सिद्धार्थनगर महा-खुलासा: गौशाला भ्रष्टाचार पर प्रशासनिक लीपापोती बेनकाब1 min read
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🚨 सिद्धार्थनगर महा-खुलासा: गौशाला भ्रष्टाचार पर प्रशासनिक लीपापोती बेनकाब; अधिकारियों की ‘क्लीन चिट’ को गौरक्षकों ने नकारा, अब सीधे डीएम की चौखट पर आर-पार की जंग!
सिद्धार्थनगर, उत्तर प्रदेश।
जनपद के ग्राम सभा धनगद्रिया (विकास खंड-जोगिया) में संचालित एनजीओ की गौशाला में व्याप्त भीषण भ्रष्टाचार, घोर अनियमितताओं और मृत गौवंश को खुले आम गड्ढों में दफन करने के संवेदनशील मामले ने अब एक भयंकर प्रशासनिक गतिरोध का रूप ले लिया है। तंत्र की घोर संवेदनहीनता और लीपापोती की नीति से आक्रोशित हिन्दू रक्षा दल के कार्यकर्ताओं ने स्थानीय प्रशासन के खिलाफ सीधे मोर्चा खोल दिया है।
🛑 पूर्व की ‘जांच रिपोर्ट’ पर उठे संगीन सवाल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गौरक्षा दल ने इस भयावह जमीनी हकीकत को लेकर पहले भी शिकायत पत्र सौंपकर त्वरित दंडात्मक कार्रवाई की गुहार लगाई थी। परंतु, अत्यंत खेदजनक स्थिति तब उत्पन्न हुई जब स्थानीय जांच में पूरे मामले को सिरे से खारिज करते हुए एनजीओ प्रबंधन को ‘क्लीन चिट’ थमा दी गई।
गौरक्षकों का स्पष्ट आरोप है कि पूर्व में प्रस्तुत की गई रिपोर्ट पूर्णतः तथ्यहीन, पक्षपातपूर्ण और दुर्भावना से प्रेरित थी, जिसका उद्देश्य केवल और केवल माफिया तंत्र को संरक्षण देना था। इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये और ‘सफेद झूठ’ को हिन्दू रक्षा दल के कार्यकर्ताओं ने पूरी तरह से नकार दिया और वे इस अन्याय के आगे झुकने को तैयार नहीं हुए।
📸 डिजिटल साक्ष्यों के साथ डीएम की अदालत में दस्तक
प्रशासनिक मिलीभगत से आक्रोशित संगठन के पदाधिकारियों ने अब सीधे जिलाधिकारी (District Magistrate), सिद्धार्थनगर की चौखट पर दस्तक दी है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनके पास इस अमानवीय कृत्य के जीपीएस लोकेशन (GPS Location) युक्त अचूक वीडियो और फोटोग्राफिक साक्ष्य उपलब्ध हैं, जो पूर्व की कागजी रिपोर्टों के झूठ को तार-तार करने के लिए पर्याप्त हैं। मुख्य पशुचिकित्साधिकारी (CVO) द्वारा जारी की गई भ्रामक आख्या को कड़ी चुनौती देते हुए संगठन ने मुख्य रूप से 8 सूत्रीय कठोर जांच की मांग का एक नया अल्टीमेटम (ज्ञापन) सौंपा है।

📝 वो 8 अचूक बिंदु, जो भ्रष्टाचार की नींव हिला देंगे:
- पशु पंजीकरण महा-सत्यापन: गौशाला के आधिकारिक पशु रजिस्टर को सार्वजनिक कर मौके पर मौजूद प्रत्येक गाय का भौतिक सत्यापन कराया जाए।
- भूसा क्रय घोटाला: भूसे की खरीद किस दर (रेट) पर हुई, इसके फर्जी बिलों और ट्रांसपोर्टेशन की उच्चस्तरीय वित्तीय ऑडिट हो।
- प्रशासनिक अनुबंध की जांच: एनजीओ किस नियम और शर्तों के आधार पर सरकारी फंड डकार रहा है, उसकी अनुबंध प्रति सार्वजनिक हो।
- प्रबंधकों का कच्चा चिट्ठा: एनजीओ संचालकों का बायोडाटा और उनके पशु-सेवा प्रशिक्षण की वैधता की गहन जांच की जाए।
- चिकित्सीय विफलता का रिकॉर्ड: पशु चिकित्सकों के आने-जाने और बीमार गायों को दी गई नकली या अनुपलब्ध दवाओं का मेडिकल रिकॉर्ड खंगाला जाए।
- गौवंश टैगिंग (Tagging) मिलान: फर्जीवाड़े को उजागर करने के लिए मौके पर मौजूद प्रत्येक गौवंश के कान के ‘टैग नंबर’ का कड़ाई से मिलान हो।
- ऑन-कैमरा पुनरीक्षण: पूर्व की पक्षपातपूर्ण रिपोर्टों को तत्काल निरस्त कर, साक्ष्यों के आधार पर ऑन-कैमरा निष्पक्ष पुन: जांच सुनिश्चित हो।
- कार्यकर्ताओं से अभद्रता पर केस: औचक निरीक्षण के दौरान एनजीओ के गुर्गों द्वारा गौरक्षकों के साथ की गई बदसलूकी और सरकारी संरक्षण की धौंस पर कठोर कानूनी कार्रवाई हो।
⚡ वर्ल्ड आई भारत न्यूज़ की तीखी टिप्पणी:
जब रक्षक ही भक्षक की भूमिका में आ जाएं और जांच समितियां सिर्फ कागजों पर ‘सब ठीक है’ का तमाशा करने लगें, तब जन-आंदोलन का जन्म होना निश्चित है। अब देखना यह है कि सिद्धार्थनगर के जिलाधिकारी इस 8 सूत्रीय महा-ज्ञापन पर क्या रुख अपनाते हैं? क्या उन भ्रष्ट अधिकारियों और एनजीओ माफियाओं पर गाज गिरेगी या फिर डिजिटल साक्ष्यों को एक बार फिर ठंडे बस्ते के हवाले कर दिया जाएगा?
ब्यूरो रिपोर्ट: वर्ल्ड आई भारत न्यूज़ (World Eye Bharat News)
