सिद्धार्थनगर: निजी अस्पताल में बुजुर्ग की मौत के बाद भीइलाज का नाटक, परिजनों ने काटा हंगामा
सिद्धार्थनगर (उत्तर प्रदेश): शहर के सांडी क्षेत्र स्थित एक निजी अस्पताल में बुधवार को परिजनों ने गंभीर आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। परिजनों का आरोप है कि मरीज की मृत्यु हो जाने के बाद भी अस्पताल प्रशासन उससे पैसे ऐंठने के उद्देश्य से इलाज का नाटक करता रहा। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने परिजनों को समझा-बुझाकर मामला शांत कराया।
यह मामला महराजगंज जिले के बुझमनगंज थाना क्षेत्र के हाता बेला हरैया (टोला शेखपुरा) की रहने वाली हेमावती (68 वर्ष) पत्नी राजकिशोर से जुड़ा है। पूरा घटनाक्रम जिला अस्पताल से लेकर निजी अस्पताल तक का है, जिसमें कथित तौर पर लापरवाही बरती गई।
📋 जिला अस्पताल से निजी अस्पताल तक का घटनाक्रम
⏳ क्या-क्या हुआ?
सोमवार रात
हेमावती (68) को पैर में तेज दर्द हुआ
मंगलवार
राहत न मिलने पर परिजन उन्हें सिद्धार्थनगर जिला अस्पताल ले गए
जिला अस्पताल से रेफर
जिला अस्पताल से निजी अस्पताल रेफर किया गया
निजी अस्पताल, सांडी
निजी अस्पताल में इलाज के दौरान हेमावती की मौत हो गई
बुधवार
परिजनों ने हंगामा किया, पुलिस ने समझा-बुझाकर शांत कराया ⏳
😡 परिजनों के गंभीर आरोप
परिजनों ने निजी अस्पताल प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं:
मौत के बाद भी इलाज का नाटक
परिजनों का आरोप — मरीज की मृत्यु हो जाने के बाद भी अस्पताल इलाज का नाटक करता रहा
पैसे ऐंठने का प्रयास
मृत्यु के बाद भी अस्पताल प्रशासन ने पैसे लेने की कोशिश की
लापरवाही का आरोप
समय पर इलाज न मिलने और लापरवाही बरतने का आरोप
पुलिस ने शांत कराया
सूचना पर पहुंची पुलिस ने समझा-बुझाकर मामला शांत किया
🚔 पुलिस की कार्रवाई
हंगामे की सूचना मिलने पर सांडी पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने परिजनों को समझा-बुझाकर मामला शांत कराया। हालांकि, अब तक इस मामले में कोई FIR दर्ज नहीं हुई है और न ही अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने आया है।
परिजनों ने पुलिस से मांग की है कि अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और मामले की जांच कराई जाए। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि मामले की जांच की जाएगी।
⚠️ यह पहली घटना नहीं
सिद्धार्थनगर जिले में यह पहला मामला नहीं है जब किसी निजी अस्पताल पर मरीज की मौत के बाद लापरवाही का आरोप लगा हो। पहले भी कई बार ऐसी शिकायतें सामने आ चुकी हैं। जिले के कई निजी अस्पतालों में अस्पताल कर्मियों की कमी, अयोग्य डॉक्टरों की नियुक्ति और मरीजों से अवैध वसूली के मामले सामने आते रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिले में सभी निजी अस्पतालों की नियमित जांच की जाती है, लेकिन शिकायतों के बावजूद कई अस्पतालों पर कोई कार्रवाई नहीं होती।
📋 मरीज की पहचान और पृष्ठभूमि
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| नाम | हेमावती (Hemavati) |
| उम्र | 68 वर्ष |
| पति का नाम | राजकिशोर |
| गांव | हाता बेला हरैया (टोला शेखपुरा) |
| थाना क्षेत्र | बुझमनगंज, महराजगंज जिला |
| शिकायत | पैर में तेज दर्द |
| पहला अस्पताल | सिद्धार्थनगर जिला अस्पताल |
| दूसरा अस्पताल | निजी अस्पताल, सांडी क्षेत्र |
🩺 स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
यह घटना एक बार फिर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाती है। मरीज को पहले जिला अस्पताल ले जाया गया, फिर वहां से निजी अस्पताल रेफर किया गया। इस बीच कई घंटे बीत गए, जिससे इलाज में देरी हुई।
परिजनों का कहना है कि अगर जिला अस्पताल में समय पर और बेहतर इलाज मिलता, तो शायद हेमावती की जान बच सकती थी। निजी अस्पताल में भी मृत्यु के बाद इलाज का नाटक करना एक गंभीर आरोप है, जिसकी जांच होनी चाहिए।
📢 परिजनों की मांग
- निजी अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए
- मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए
- जिला अस्पताल में इलाज की गुणवत्ता सुधारी जाए
- निजी अस्पतालों पर नियमित निगरानी बढ़ाई जाए
- मृत्यु के बाद पैसे वसूली के मामलों में सख्त कानून बनाए जाएं
📢 सारांश: 10 पॉइंट में समझें
- सिद्धार्थनगर के सांडी क्षेत्र के निजी अस्पताल में बुजुर्ग की मौत
- मरीज हेमावती (68), पति राजकिशोर, महराजगंज की रहने वाली
- सोमवार रात पैर में तेज दर्द, मंगलवार जिला अस्पताल ले गए
- जिला अस्पताल से निजी अस्पताल रेफर किया गया
- निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत
- परिजनों का आरोप — मौत के बाद भी इलाज का नाटक किया गया
- पैसे ऐंठने के उद्देश्य से मृत्यु छुपाने का आरोप
- बुधवार परिजनों ने हंगामा किया
- पुलिस ने समझा-बुझाकर मामला शांत कराया
- अब तक कोई FIR नहीं, जांच की मांग
🔮 आगे क्या?
अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक कार्रवाई नहीं हुई है। परिजनों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि निजी अस्पताल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। मामले की जांच के लिए एक मेडिकल बोर्ड गठित करने की मांग भी की गई है।
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जाएगी और अगर अस्पताल प्रशासन दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे आश्वासन पहले भी मिलते रहे हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं होती।
📰 यह खबर Kapilvastupost, Dainik Bhaskar और स्थानीय स्रोतों पर आधारित है
🕐 प्रकाशित: 6 अगस्त 2026 | ✍️ रिपोर्ट
