सिद्धार्थनगर: बढ़नी के रड़वरिया ग्राम पंचायत में ‘VB-G RAM G’ योजना के तहत बड़ा फर्जीवाड़ा; बगही (रजाई मुस्तफा) में गायब मिले पेड़, तो रेडवरिया में आधे-अधूरी हिस्से में JCB से अवैध खुदाई1 min read
ग्राउंड जीरो रिपोर्ट | ‘वर्ड आई भारत न्यूज़’
अपडेटेड: अक्टूबर 2026
मुख्य बातें (Key Highlights):
- ग्राम पंचायत रड़वरिया का दायरा: सिद्धार्थनगर जिले के बढ़नी ब्लॉक की ग्राम पंचायत रड़वरिया के अंतर्गत आने वाले रेडवरिया गांव, बगही और रजाई मुस्तफा क्षेत्रों में ग्रामीण विकास योजनाओं के नाम पर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।
- बगही (रजाई मुस्तफा) में कागजी वृक्षारोपण: बगही स्थित रजाई मुस्तफा पशुचर जमीन पर पिछले लगभग एक महीने से वृक्षारोपण का दावा किया जा रहा था, लेकिन मौके पर न तो एक भी पेड़ मौजूद है और न ही सुरक्षा के लिए कोई घेराबंदी की गई है।
- रेडवरिया गांव में JCB से अधूरी खुदाई: मुख्य रेडवरिया गांव में पशुचर जमीन के चारों तरफ खुदाई का दावा किया जा रहा था, जबकि धरातल पर चारों तरफ काम न होकर केवल एक तरफ से आधे से थोड़ा ज्यादा हिस्से में ही जेसीबी (JCB) मशीन से अवैध खुदाई कराई गई है।
- सेक्रेटरी के झूठे दावे और टालमटोल: जब इस संबंध में मौके पर सेक्रेटरी साहब से बात की गई, तो उन्होंने दावा किया कि पेड़ लगाए गए हैं और वे टीम को मौके पर चलकर दिखाएंगे। लेकिन अगले दिन तय समय पर सेक्रेटरी साहब टालमटोल करते रहे और न तो खुद आए और न ही टीम को कोई पेड़ दिखा सके।
- फर्जी हाजिरी और बड़ा सवाल: जब धरातल पर सारा काम मशीनों से हो रहा है और पेड़ गायब हैं, तो फिर एनएमएमएस (NMMS) ऐप और ऑनलाइन पोर्टल पर मजदूरों की फर्जी हाजिरी कैसे और किसकी शह पर दर्ज की जा रही है?
विस्तृत समाचार (Detailed News):
बढ़नी (सिद्धार्थनगर)। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के बढ़नी ब्लॉक स्थित ग्राम पंचायत रड़वरिया के विभिन्न गांवों और मजरों में सरकारी योजनाओं को किस तरह से पलीता लगाया जा रहा है, इसकी एक व्यापक तस्वीर सामने आई है। ‘वर्ड आई भारत न्यूज़’ की टीम द्वारा की गई जमीनी पड़ताल में यह साफ हुआ है कि ‘विकसित भारत-रोज़गार एवं आजीविका के लिए गारंटी मिशन’ (VB-G RAM G) योजना के तहत कागजों पर विकास दिखाया जा रहा है, जबकि धरातल पर नियमों का खुला उल्लंघन हो रहा है।
बगही (रजाई मुस्तफा) पस्तर जमीन पर गायब मिले पेड़

रड़वरिया ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले बगही (रजाई मुस्तफा) पशुचर जमीन पर पिछले करीब एक महीने से पेड़ लगाने के दावे किए जा रहे थे। जब मौके की असलियत टटोली गई, तो वहां वृक्षारोपण का कोई नामो-निशान नहीं मिला। हैरानी की बात यह है कि बिना किसी सुरक्षा घेराबंदी (Fencing) के बड़े बजट की निकासी की तैयारी है, और अंदेशा है कि बाद में मवेशियों द्वारा खाए जाने का बहाना बनाकर मामले पर पर्दा डाल दिया जाएगा।
रेडवरिया गांव में मशीनों से खुदाई और सेक्रेटरी के दावों की खुली पोल

इसी ग्राम पंचायत के मुख्य रेडवरिया गांव में पशुचर जमीन के चारों तरफ कार्य कराए जाने का दावा था, लेकिन जमीनी हकीकत यह मिली कि चारों तरफ काम न होकर केवल एक तरफ से आधे से अधिक हिस्से में ही जेसीबी (JCB) मशीन से खुदाई कराई गई है। इस श्रम-आधारित योजना में स्थानीय मजदूरों को रोजगार देने के बजाय पूरी तरह से मशीनों का इस्तेमाल किया गया है।
जब इस पूरे मामले पर मौके पर मौजूद टीम ने सेक्रेटरी साहब से बातचीत की, तो उन्होंने बड़ी आसानी से दावा कर दिया कि पेड़ लगाए गए हैं और वे खुद टीम को चलकर दिखाएंगे। लेकिन अगले दिन जब मिलने या दिखाने की बात आई, तो सेक्रेटरी साहब लगातार टालमटोल करते रहे और मौके पर नहीं पहुँचे। टीम को एक भी पौधा दिखाने में पूरी तरह असमर्थ रहे।

यहाँ सबसे बड़ा और झकझोर देने वाला सवाल यह उठता है कि जब मौके पर मजदूरों से काम ही नहीं कराया गया, आधे-अधूरी जगह मशीनों से खुदाई हुई और पेड़ कागजों में गायब हैं, तो फिर ऑनलाइन पोर्टल और मस्टर रोल पर दर्जनों मजदूरों की रोजाना हाजिरी कैसे और किसकी शह पर लग रही है? धरातल पर बमुश्किल 10-15 लोगों की फोटो खींचकर या कागजी खानापूर्ति कर फर्जी उपस्थिति दर्ज कराने का यह खेल सीधे तौर पर सरकारी धन के बड़े घोटाले की ओर इशारा करता है। जिम्मेदार अधिकारियों और प्रधान-सेक्रेटरी का इस तरह सवालों से भागना, झूठे दावे करना और टालमटोल करना प्रशासनिक मिलीभगत पर गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या जनता के गाढ़े पसीने की कमाई को इस तरह कागजों में डकार जाना ही इनका प्रशासनिक दायित्व रह गया है?
जनहित और पारदर्शिता की मांग को देखते हुए अब यह बेहद जरूरी हो गया है कि उच्चाधिकारी इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जाँच करें और सरकारी धन के दुरुपयोग एवं जनता के साथ हो रहे इस छलावा पर सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें।
(सोर्स: ग्राउंड रिपोर्ट)
(डिस्क्लेमर: यह खबर मौके की जमीनी पड़ताल, डिजिटल साक्ष्यों और प्राप्त तथ्यों के आधार पर तैयार की गई है। रिपोर्ट का उद्देश्य जनहित के मुद्दों और प्रशासनिक पारदर्शिता को सामने लाना है। संबंधित पक्ष या अधिकारियों का पक्ष मिलने पर उसे अगली खबर में प्रमुखता से जोड़ा जाएगा।)
(रिपोर्ट: ‘वर्ड आई भारत न्यूज़’)

