बलरामपुर: पचपेड़वा के लक्ष्मीनगर गौशाला की खौफनाक सच्चाई! इलाज के अभाव में तड़प-तड़प कर दम तोड़ रही हैं बेजुबान गायें, मृत मवेशियों को नदी में फेंकने से प्रशासनिक लापरवाही की सारी हदें पार1 min read
ग्राउंड ज़ीरो रिपोर्ट | ‘World Eye Bharat News’
अपडेटेड: अक्टूबर 2026
🚨 ग्राउंड ज़ीरो की आंखों देखी हकीकत और ग्रामीणों का दर्द:
- दावों के विपरीत सिर्फ सूखा भूसा: प्रबंधन भले ही चारे और दाने के पर्याप्त होने के बड़े दावे करता हो, लेकिन जब ‘World Eye Bharat News’ की टीम दोपहर के वक्त मौके पर पहुँची, तो गौशाला में मौजूद कुछ गायें और उनके बच्चे सिर्फ सूखा भूसा चबाने को विवश नजर आए।
- 98% गोवंश गायब और नियमों की धज्जियां: सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि टीम के पहुँचने पर गौशाला के भीतर लगभग 98% गायें और गोवंश मौजूद ही नहीं थे; वहाँ मौजूद स्थानीय निवासियों और अंदर काम कर रहे कर्मियों ने बताया कि उन्हें यहाँ से करीब 2 किलोमीटर दूर बाहर चराने के लिए लेकर जाया गया है।
- टैगविहीन मवेशी: गौशाला में जो इक्का-दुक्का मवेशी नजर भी आए, उनमें से अधिकांश गायों के कानों में पहचान के लिए लगाए जाने वाले सरकारी ‘टैग’ (Tag) तक मौजूद नहीं थे।
- डॉक्टरों की गैरजिम्मेदारी और तड़पते गोवंश: अंदर काम कर रहे कर्मियों और स्थानीय निवासियों ने बताया कि डॉक्टर साहब लगभग 8 दिन पहले आए थे। इस बीच के अंतराल में भी दो-तीन गायों की मौत हो चुकी है। चिकित्सीय सुविधाओं के अभाव में बीमार और लाचार गायें गौशाला के भीतर तड़प-तड़प कर मरने को मजबूर हैं।
- नदी में फेंकी जा रही मरी गायें और आवारा जानवरों का आतंक: प्रशासनिक लापरवाही की सारी हदें तब पार हो जाती हैं जब गौशाला में दम तोड़ने वाले गोवंश और मृत मवेशियों को नियमानुसार दफनाने या ठिकाने लगाने के बजाय खुलेआम बगल की नदी में फेंक दिया जा रहा है।
- बाहर खींचते जानवर और बिखरी हड्डियां: नदी में फेंके गए इन मृत पशुओं के शवों को जब आवारा जानवर खींचकर बाहर ले आते हैं, तो तटों और रास्तों पर मवेशियों की सड़ी-गली हड्डियां और कंकाल खुलेआम बिखर जाते हैं।
- ग्रामीणों का आवागमन और संक्रामक खतरा: मवेशियों की इन बिखरी हड्डियों और सड़े-गले अवशेषों के कारण वहाँ से गुजरने वाले राहगीरों व स्थानीय ग्रामीणों को आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही, इससे पूरे क्षेत्र में भयंकर दुर्गंध और गंभीर जानलेवा संक्रमण फैलने का खतरा पैदा हो गया है।
- जिम्मेदारों के फोन लगातार ‘अनवेलेबल’: इस गंभीर मामले पर ग्राम प्रधान और सचिव का पक्ष जानने के लिए हमारी टीम द्वारा पिछले दो-तीन दिनों से लगातार फोन पर संपर्क साधने की कोशिश की गई, लेकिन उनके नंबर लगातार ‘अनवेलेबल’ (Unavailable) मिले और उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया।
- ठोस साक्ष्य और रिकॉर्डिंग मौजूद: इस अमानवीय कृत्य, बदहाली और स्थानीय लोगों के साक्षात्कारों की तमाम वीडियो रिकॉर्डिंग और पुख्ता साक्ष्य हमारी टीम के पास सुरक्षित मौजूद हैं।

❓ संवेदनशील अधिकारियों से सवाल:
- जब गौशाला से 98% गोवंश गायब मिले और उन्हें 2 किलोमीटर दूर चराने का बहाना बनाया गया, तो क्या यह कागजी मस्टर रोल और चारे-पानी के अनुदान को हड़पने का महज एक छलावा नहीं है?
- अधिकांश गायों के कानों में टैग न होना क्या इस बात का प्रमाण नहीं है कि सरकारी व्यवस्थाओं को ताक पर रखकर कागजों में हेराफेरी की जा रही है?
- जब डॉक्टर साहब हफ्तों-महीनों पहले आते हैं और इस बीच लगातार गायों की मौत हो रही है, तो इन मौतों की जवाबदेही आखिर कौन तय करेगा?
- क्या सरकारी दस्तावेजों में ‘संरक्षण’ के नाम पर पलने वाले ये बेजुबान सिर्फ इसलिए तड़प-तड़प कर मरने के लिए हैं क्योंकि इनका दर्द देखने वाला कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं बचा?
- एक तरफ शासन की प्राथमिकता गोवंश सेवा है, तो वहीं दूसरी तरफ मृत गायों को इस तरह नदी में फेंककर, उन्हें आवारा जानवरों द्वारा बाहर घसीटे जाने और रास्तों पर हड्डियां फैलने देने जैसी अमानवीय प्रशासनिक लापरवाही के असली जिम्मेदार कौन लोग हैं?
- मीडिया द्वारा संपर्क करने पर सचिव और प्रधान का फोन लगातार बंद मिलना या सामने न आना क्या किसी बड़ी प्रशासनिक मिलीभगत और भ्रष्टाचार का खुला संकेत नहीं है?
📢 World Eye Bharat News की सख्त चेतावनी और मांग
’World Eye Bharat News’ के पास इस पूरी बर्बरता, तड़पते मवेशियों, नदी में फेंके जाने वाले शवों और रास्तों पर फैली हड्डियों के अकाट्य साक्ष्य और वीडियो मौजूद हैं। हम जिलाधिकारी बलरामपुर और संबंधित उच्चाधिकारियों से पुरजोर अपील करते हैं कि अपनी संवेदनाओं को जगाते हुए लक्ष्मीनगर गौशाला की तत्काल उच्चस्तरीय निष्पक्ष जाँच कराएँ। गोवंश के जीवन से खिलवाड़ करने वाले, टैगविहीन मवेशी रखने वाले और मृत मवेशियों को नदी में फेंककर प्रशासनिक लापरवाही की सारी हदें पार करने वाले उन तमाम दोषियों पर कठोरतम कानूनी व विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि इन बेजुबानों की आह का हिसाब हो सके और आम जनता को इस नरक जैसी स्थिति से मुक्ति मिले।
📍 स्थान: ग्राम पंचायत लक्ष्मीनगर, विकासखंड पचपेड़वा (बलरामपुर)
🎤 रिपोर्ट: World Eye Bharat News
(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट मौके की जमीनी पड़ताल, डिजिटल साक्ष्यों और प्राप्त तथ्यों के आधार पर तैयार की गई है। रिपोर्ट का उद्देश्य जनहित के मुद्दों को सामने लाना है। संबंधित पक्ष या अधिकारियों का पक्ष मिलने पर उसे अगली खबर में प्रमुखता से जोड़ा जाएगा।)

