उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी सफलता: 100 दिवसीय विशेष अभियान में मिले 1.85 लाख नए टीबी मरीज, राज्य ने रचा इतिहास1 min read
‘वर्ड आई भारत न्यूज़’
अपडेटेड: अक्टूबर 2026
मुख्य बातें (Key Highlights):
- अभियान की ऐतिहासिक सफलता: उत्तर प्रदेश ने ‘100-Day TB Mukt Bharat Abhiyaan’ के तहत देश भर में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए रिकॉर्ड 1.85 लाख नए टीबी (तपेदिक) मरीज खोज निकाले हैं।
- व्यापक स्तर पर स्क्रीनिंग: इस विशेष अभियान के दौरान राज्यभर में 31 लाख से अधिक लोगों की गहन स्वास्थ्य जांच (स्क्रीनिंग) की गई।
- असिम्पटोमैटिक (बिना लक्षण वाले) मामलों का खुलासा: चौंकाने वाली बात यह रही कि पाए गए कुल मामलों में से 52% मरीजों में टीबी के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं थे, जिनका पता सक्रिय निगरानी और उन्नत जाँच के जरिए चला।
- उन्नत तकनीक का इस्तेमाल: राज्य में सक्रिय मामलों की त्वरित पहचान के लिए 1,414 अपफ्रंट न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्ट (NAAT) केंद्रों और आधुनिक डायग्नोस्टिक्स का व्यापक उपयोग किया गया।
विस्तृत समाचार (Detailed News):
लखनऊ। देश से क्षय रोग (तपेदिक/टीबी) को जड़ से समाप्त करने के राष्ट्रीय संकल्प के तहत उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है। राज्य ने 100 दिवसीय विशेष टीबी मुक्ति अभियान के दौरान अपनी उन्नत प्रशासनिक रणनीतियों और सक्रिय निगरानी के दम पर 1.85 लाख नए टीबी रोगियों की पहचान कर उन्हें उपचार के दायरे में लाया है।
31 लाख लोगों की हुई स्क्रीनिंग, उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों पर फोकस
स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, इस राष्ट्रव्यापी और राज्य-समर्थित स्वास्थ्य पहल के तहत उत्तर प्रदेश के दूरदराज के ग्रामीण इलाकों और उच्च जोखिम वाले शहरी वार्डों में विशेष अभियान चलाए गए। अभियान के तहत कुल 31 लाख से अधिक लोगों की लक्षित स्क्रीनिंग की गई। इस दौरान स्वास्थ्य कर्मियों ने घर-घर जाकर और कैंप लगाकर संदिग्ध मरीजों की पहचान की।
52% ऐसे मरीज मिले जिनमें नहीं थे कोई लक्षण
विशेषज्ञों के लिए यह सर्वे बेहद चौकाने वाला और आंखें खोलने वाला रहा। इस विशेष सर्वेक्षण और स्क्रीनिंग के दौरान यह बात सामने आई कि 52% टीबी मरीजों में बीमारी के पारंपरिक लक्षण नजर ही नहीं आ रहे थे। ऐसे लक्षणहीन (Asymptomatic) मरीजों की समय रहते पहचान केवल इसलिए संभव हो सकी क्योंकि स्वास्थ्य विभाग ने सक्रिय खोज (Active Case Finding) और आधुनिक तकनीक का सहारा लिया। यदि यह अभियान न चलाया जाता, तो ये छिपे हुए मरीज अनजाने में संक्रमण फैलाने का जरिया बन सकते थे।
मजबूत डायग्नोस्टिक नेटवर्क और NAAT केंद्रों की भूमिका
तपेदिक के खिलाफ इस जंग को सफल बनाने में राज्य के मजबूत चिकित्सीय बुनियादी ढांचे ने अहम भूमिका निभाई। उत्तर प्रदेश में बनाए गए 1,414 अपफ्रंट न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्ट (NAAT) केंद्रों पर हजारों संदिग्धों के सैंपल की सटीक और त्वरित जांच की गई। समय पर सटीक डायग्नोसिस होने से मरीजों का तुरंत इलाज शुरू किया जा सका, जिससे राज्य में टीबी के प्रसार पर प्रभावी लगाम लगी है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश का यह एकीकृत और आक्रामक मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक बेहतरीन मार्गदर्शिका बन सकता है, जिससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने के सपने को जमीन पर उतारा जा सके।
(सोर्स: स्वास्थ्य विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार एवं विशेष ग्राउंड रिपोर्ट)
(डिस्क्लेमर: यह समाचार स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों और प्रतिष्ठित चिकित्सा रिपोर्टों के आधार पर जनहित में प्रकाशित किया गया है।)
(रिपोर्ट: ‘वर्ड आई भारत न्यूज़’)
