लखनऊ में नकली दवाओं का बड़ा रैकेट भंडाफोड़ — राजस्थान से जुड़ी सप्लाई चेन का खुलासा, ₹20 करोड़ की दवाएं जब्त
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लखनऊ में नकली दवाओं का बड़ा रैकेट भंडाफोड़ — राजस्थान से जुड़ी सप्लाई चेन का खुलासा, ₹20 करोड़ की दवाएं जब्त
फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FSDA), उत्तर प्रदेश · 22 जुलाई 2026
उत्तर प्रदेश में नकली दवाओं का कारोबार सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FSDA) की जांच में सामने आया है कि भारी मुनाफे के लालच में एक संगठित नेटवर्क लखनऊ सहित कई जिलों में नकली दवाओं की सप्लाई कर रहा था, जिसकी जड़ें राजस्थान, हरियाणा और उत्तराखंड तक फैली हुई हैं।
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₹20 करोड़
लखनऊ व अन्य जगहों से
जब्त नकली दवाएं |
6 जिले
आगरा, लखनऊ, गोंडा, लखीमपुर खीरी,
महाराजगंज, गोरखपुर में छापेमारी |
3 राज्य
राजस्थान, हरियाणा व उत्तराखंड से
UP में हो रही थी सप्लाई |
क्या है पूरा मामला?
FSDA की जांच में खुलासा हुआ है कि नामी-गिरामी दवा कंपनियों की पैकेजिंग और ब्रांडिंग की हूबहू नकल कर बनाई गई नकली दवाओं को बाजार में उतारा जा रहा था। जांच एजेंसियों के अनुसार असली दवाओं पर मेडिकल स्टोर संचालकों को सीमित मुनाफा मिलता है, जबकि नकली दवाएं बेचने पर कहीं अधिक मुनाफा होता है — और यही लालच इस पूरे अवैध नेटवर्क को बढ़ावा दे रहा था।
अधिकारियों के अनुसार नकली दवा सप्लायर रिटेलरों को दवाएं छपे हुए MRP से कहीं कम कीमत पर उपलब्ध कराते थे, जिससे विक्रेताओं को असामान्य रूप से ऊंचा मुनाफा मिलता था। जांच में यह भी सामने आया कि नकली दवाओं की सप्लाई का तरीका असली दवा व्यापार से बिल्कुल अलग है — जहां असली दवाओं की खरीद में बाकायदा बिल और तुरंत भुगतान होता है, वहीं नकली दवाएं अक्सर बिना बिल के उधार पर सप्लाई की जाती हैं और रिटेलर स्टॉक बिकने के बाद ही सप्लायर को भुगतान करते हैं, जिससे यह अवैध नेटवर्क आसानी से फैलता और चलता रहता है।
“मेडिकल स्टोर संचालक बिना उचित बिल के दवाएं न खरीदें और न बेचें। जांच के दौरान बिना वैध दस्तावेज के दवाएं मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
— डॉ. रोशन जैकब, आयुक्त, FSDA उत्तर प्रदेश
कौन-कौन सी नकली दवाएं मिलीं?
जांच के दौरान सामने आए कई मामलों ने इस रैकेट की गंभीरता को उजागर किया है। एक मामले में ब्लड प्रेशर की दवा टेल्मा-एच (Telma H) की नकली खेप जब्त की गई, जिसका असली MRP करीब 380 रुपये प्रति स्ट्रिप है, लेकिन इसे नकली दवा नेटवर्क के जरिए रिटेलरों को महज 25 से 30 रुपये प्रति स्ट्रिप में सप्लाई किया जा रहा था। एक अन्य मामले में बवासीर (पाइल्स) के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा, जिसका बाजार मूल्य करीब 980 रुपये है, महज 100 रुपये प्रति स्ट्रिप में बेची जा रही थी।
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🚨 खतरे की मुख्य बातें
❌ नकली दवाओं में सक्रिय तत्व (API) नाममात्र या शून्य ❌ कुछ मामलों में सामान्य पदार्थों से असली जैसी गोलियां बनाई गईं ❌ बिना बिल, उधार आधारित अवैध सप्लाई चेन ❌ मरीजों के लिए इलाज बेअसर होने व गंभीर स्वास्थ्य खतरे की आशंका |
✅ प्रशासन की कार्रवाई
✅ 6 जिलों में समन्वित छापेमारी अभियान ✅ ₹20 करोड़ मूल्य की नकली दवाएं जब्त ✅ गिरफ्तार संदिग्धों से पूछताछ के आधार पर आगे की छापेमारी ✅ अंतरराज्यीय सप्लाई चेन की पहचान जारी |
राजस्थान समेत तीन राज्यों से जुड़ी सप्लाई चेन
पूछताछ के दौरान जांचकर्ताओं को पता चला कि कुछ नकली दवाएं राजस्थान, हरियाणा और उत्तराखंड से उत्तर प्रदेश में लाई जा रही थीं। इन दवाओं को पहले निर्माण स्थलों से गुप्त गोदामों तक पहुंचाया जाता था, और वहां से छोटे कस्बों व स्थानीय मेडिकल स्टोरों तक इनकी डिलीवरी होती थी। FSDA टीमों ने आगरा, लखनऊ, गोंडा, लखीमपुर खीरी, महाराजगंज और गोरखपुर सहित कई जिलों में अभियान चलाकर बड़ी मात्रा में संदिग्ध नकली दवाओं की खेप बरामद की।
विशेषज्ञों की राय
साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, नकली दवाओं के नेटवर्क जैसे संगठित अपराध अब डिजिटल तरीकों का भी भरपूर इस्तेमाल कर रहे हैं। आपराधिक गिरोह ऑनलाइन संचार माध्यमों, जाली दस्तावेजों, फर्जी कंपनी पहचान और छिपे हुए भुगतान नेटवर्क के जरिए अपना कारोबार चला रहे हैं। उनका कहना है कि केवल नकली दवाएं जब्त करना पर्याप्त नहीं है — एजेंसियों को पूरी वित्तीय कड़ी, सप्लाई चेन और इसमें शामिल लाभार्थियों की पहचान करनी होगी।
घटनाक्रम
📅 समयरेखा
🔍 पूर्व में — FSDA को नकली दवाओं की शिकायतें मिलनी शुरू हुईं
🕵️ जांच के दौरान — गिरफ्तार संदिग्धों से मिली जानकारी के आधार पर कई जिलों में छापे
🏭 छापेमारी में — आगरा, लखनऊ, गोंडा, लखीमपुर खीरी, महाराजगंज, गोरखपुर में कार्रवाई
🛣️ पूछताछ में खुलासा — राजस्थान, हरियाणा व उत्तराखंड से जुड़ी सप्लाई चेन सामने आई
📢 22 जुलाई 2026 — ₹20 करोड़ मूल्य की नकली दवाओं की जब्ती की पुष्टि
मरीजों और दुकानदारों के लिए सलाह
विशेषज्ञों ने कहा है कि नकली दवाओं पर नियंत्रण के लिए फार्मास्युटिकल सप्लाई चेन की सख्त निगरानी, डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम, नियमित निरीक्षण और आम जनता में जागरूकता बेहद जरूरी है। मरीजों को सलाह दी गई है कि दवा खरीदते समय पैकेजिंग, बैच नंबर, निर्माता का विवरण और खरीद बिल जरूर जांच लें, ताकि नकली दवाओं के इस्तेमाल का खतरा कम किया जा सके।
📌 मुख्य बात: उत्तर प्रदेश के FSDA ने लखनऊ सहित छह जिलों में छापेमारी कर करीब ₹20 करोड़ मूल्य की नकली दवाएं जब्त की हैं। जांच में सामने आया है कि यह रैकेट राजस्थान, हरियाणा और उत्तराखंड से जुड़ी एक संगठित अंतरराज्यीय सप्लाई चेन के जरिए चलाया जा रहा था। अधिकारियों ने मेडिकल स्टोर संचालकों को बिना बिल के दवाएं न खरीदने की सख्त हिदायत दी है और जांच जारी रखने का भरोसा दिलाया है।
स्रोत: The420.in · फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन, उत्तर प्रदेश · 22 जुलाई 2026।
यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया मूल हिंदी आलेख है।
