उत्तर प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़ा विस्तार: 17,542 करोड़ रुपये की लागत से बनेंगे 4 नए लिंक एक्सप्रेसवे, योगी कैबिनेट की मुहर1 min read
ग्राउंड ज़ीरो रिपोर्ट | ‘वर्ड आई भारत न्यूज़’
अपडेटेड: अक्टूबर 2026
मुख्य बातें (Key Highlights):
- कैबिनेट का बड़ा फैसला: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में उत्तर प्रदेश के सड़क नेटवर्क को सुदृढ़ करने के लिए चार नए लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है।
- भारी-भरकम बजट: इन चारों परियोजनाओं के निर्माण पर कुल लगभग ₹17,542.06 करोड़ की लागत आएगी, जिसका पूरा वहन राज्य सरकार करेगी।
- कनेक्टिविटी में सुधार: इसके तहत फर्रुखाबाद, झांसी, जेवर और आगरा-लखनऊ से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे तक के क्षेत्रों को आपस में जोड़ा जाएगा, जिससे पश्चिमी और पूर्वी यूपी के बीच सफर तेज व सुगम होगा।
- रोजगार के अवसर: इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 760 लाख मानव दिवस के रोजगार सृजित होने का अनुमान है।
विस्तृत समाचार (Detailed News):
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य में यातायात और परिवहन व्यवस्था को और अधिक आधुनिक तथा तेज बनाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मंगलवार को संपन्न हुई कैबिनेट बैठक में कुल 22 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगी, जिसमें राज्य में 17,542 करोड़ रुपये की लागत से चार नए लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण और उनके निर्माणकर्ताओं (डवलपर्स) के चयन के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई।
यूपीडा (UPEIDA) के माध्यम से क्रियान्वित होने वाली इन परियोजनाओं का उद्देश्य प्रदेश के मौजूदा एक्सप्रेसवे नेटवर्क को बेहतर ढंग से आपस में जोड़ना और दूरदराज के जिलों को मुख्य मार्गों से सीधा संपर्क देना है।
किन प्रमुख क्षेत्रों को मिलेगा सीधा लाभ?
- फर्रुखाबाद और झांसी लिंक एक्सप्रेसवे: इन दोनों महत्वपूर्ण लिंक एक्सप्रेसवे (पैकेज-I और पैकेज-II) के बनने से बुंदेलखंड और मध्य यूपी के क्षेत्रों की मुख्य एक्सप्रेसवे नेटवर्क से कनेक्टिविटी बेहद मजबूत होगी।
- आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी: यह परियोजना सामरिक और व्यावसायिक दोनों दृष्टियों से बेहद अहम है। इसके जरिए प्रदेश के पश्चिमी छोर को सीधे पूर्वी छोर (बिहार बॉर्डर तक) से निर्बाध आवागमन का लाभ मिलेगा।
- जेवर लिंक एक्सप्रेसवे: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) के आसपास के क्षेत्र और एक्सप्रेसवे नेटवर्क के बीच संपर्क को और अधिक सुगम बनाने के लिए इस लिंक प्रोजेक्ट को विकसित किया जा रहा है।
निर्माण अवधि और गुणवत्ता मानक
सरकार की योजना के मुताबिक, इन सभी परियोजनाओं का निर्माण ईपीसी (EPC – Engineering, Procurement, and Construction) पद्धति के तहत कराया जाएगा। निर्माणकर्ताओं के चयन के बाद इन्हें लगभग 3 वर्ष की समयसीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके उपरांत, अगले 5 वर्षों तक संबंधित निर्माण कंपनियों द्वारा इन सड़कों के अनुरक्षण (रखरखाव) की जिम्मेदारी संभाली जाएगी। इन पर आने वाला पूरा खर्च राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा, जिसमें केंद्र की कोई वित्तीय भागीदारी अपेक्षित नहीं है।
इस महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना से न केवल सफर का समय घटेगा, बल्कि औद्योगिक गतिविधियों, परिवहन और स्थानीय स्तर पर बंपर रोजगार के नए द्वार भी खुलेंगे।
(सोर्स: राज्य सरकार के आधिकारिक नीतिगत निर्णय एवं प्रशासनिक रिपोर्ट)
(डिस्क्लेमर: यह समाचार कैबिनेट बैठक में पारित प्रस्तावों और आधिकारिक प्रेस बयानों के आधार पर जनहित में प्रकाशित किया गया है।)
(रिपोर्ट: ‘वर्ड आई भारत न्यूज़’)
