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जन्म-मृत्यु पंजीकरण कानून में बड़ा बदलाव — राष्ट्रपति की मंजूरी1 min read

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🔴 बड़ी खबर · नई दिल्ली

जन्म-मृत्यु पंजीकरण कानून में बड़ा बदलाव — राष्ट्रपति की मंजूरी, अब 2 साल तक की देरी पर मजिस्ट्रेट के आदेश से बनेगा काम

Registration of Births and Deaths (Amendment) Act, 2026 · राष्ट्रपति भवन

भारत में जन्म और मृत्यु पंजीकरण से जुड़े कानून में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद Registration of Births and Deaths (Amendment) Act, 2026 अब आधिकारिक रूप से पारित कानून बन चुका है। इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य विलंबित पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है, ताकि रिकॉर्ड की विश्वसनीयता बनी रहे और फर्जी पंजीकरण पर रोक लग सके।

1-2 साल की देरी
DM/SDM/कार्यपालक मजिस्ट्रेट
के आदेश से पंजीकरण
2 साल से अधिक देरी
प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट
के आदेश की जरूरत
अधिनियम संख्या 12
वर्ष 2026 का
अधिनियम

क्या है पूरा मामला?

राष्ट्रपति ने Registration of Births and Deaths (Amendment) Act, 2026 (अधिनियम संख्या 12 सन् 2026) को मंजूरी दे दी है, जो जन्म-मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 13 में संशोधन करता है। यह विधेयक बीते सप्ताह संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका था। कानून लागू होने की तारीख केंद्र सरकार द्वारा अलग से अधिसूचित की जाएगी।

संशोधन का असर विशेष रूप से उन मामलों पर पड़ेगा, जहां जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के एक साल बाद दी जाती है। पहले ऐसे सभी विलंबित मामलों में जिला मजिस्ट्रेट, उप-जिला मजिस्ट्रेट या अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश की जरूरत होती थी। नए कानून ने इस प्रक्रिया को घटना की देरी की अवधि के आधार पर दो अलग-अलग स्तरों में बांट दिया है।

“दो साल से अधिक विलंबित मामलों में प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की मंजूरी अनिवार्य करने से उन मामलों में अधिक न्यायिक जांच सुनिश्चित होगी, जहां फर्जी दावों की आशंका ज्यादा रहती है। साथ ही वास्तविक आवेदकों को पंजीकरण से वंचित नहीं किया जाएगा — उन्हें केवल अदालत के समक्ष घटना की प्रामाणिकता साबित करनी होगी।”
— सत्य प्रकाश सिंह, वरिष्ठ सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता व संवैधानिक विशेषज्ञ

पुरानी व्यवस्था बनाम नई व्यवस्था

📋 एक से दो साल की देरी (धारा 13(3))

✅ जिला मजिस्ट्रेट (DM) के आदेश से पंजीकरण

✅ उप-जिला मजिस्ट्रेट (SDM) भी आदेश दे सकते हैं

✅ DM द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट भी सक्षम

✅ घटना की सत्यता जांचने के बाद व निर्धारित शुल्क पर आदेश

⚖️ दो साल से अधिक देरी (नई धारा 13(3A))

🔹 केवल प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश से पंजीकरण

🔹 कार्यपालिका के बजाय न्यायपालिका की भूमिका

🔹 मजिस्ट्रेट को घटना की सत्यता स्वयं सत्यापित करनी होगी

🔹 निर्धारित शुल्क के भुगतान पर ही आदेश जारी होगा

संसद में कैसे पारित हुआ यह विधेयक?

केंद्रीय मंत्रिमंडल से 20 जुलाई को मंजूरी मिलने के कुछ दिनों बाद, गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने 29 जुलाई 2026 को यह विधेयक लोकसभा में पेश किया। इसके बाद विधेयक दोनों सदनों से पारित हुआ। राज्यसभा में विधेयक ध्वनिमत से पारित हुआ, हालांकि विपक्षी सदस्यों ने इस दौरान गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी की मांग को लेकर हंगामा भी किया।

चर्चा के दौरान UPPL सांसद प्रमोद बोरो ने विधेयक के उद्देश्य का समर्थन करते हुए भी यह सवाल उठाया कि दो साल से अधिक विलंबित मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश की अनिवार्यता प्रशासनिक जिम्मेदारी को न्यायपालिका पर डालती है, जो पहले से ही आपराधिक व सिविल मामलों के बोझ तले दबी है। उन्होंने आशंका जताई कि इससे प्रवासियों, बेघर लोगों, गरीबों और दूरदराज क्षेत्रों में रहने वालों के लिए पंजीकरण और मुश्किल हो सकता है। वहीं BJD सांसद संत्रुप्त मिश्रा ने सरकार से यह जांचने को कहा कि आखिर जन्म-मृत्यु का पंजीकरण देरी से क्यों होता है।

सरकार का तर्क क्या है?

सरकार का कहना है कि यह कदम रिकॉर्ड को मजबूत बनाने, मतदाता सूचियों के दुरुपयोग को रोकने और देशभर में समय पर पंजीकरण को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है। जन्म प्रमाणपत्र किसी भी व्यक्ति का पहला कानूनी पहचान दस्तावेज होता है, इसलिए सरकार का मानना है कि पंजीकरण प्रक्रिया में पारदर्शिता और सत्यापन बेहद जरूरी है। हालांकि सटीक शुल्क राशि को अलग से बनाए जाने वाले नियमों के जरिए अधिसूचित किया जाएगा।

घटनाक्रम

📅 समयरेखा

🗂️ 20 जुलाई 2026 — केंद्रीय मंत्रिमंडल से विधेयक को मंजूरी

🏛️ 29 जुलाई 2026 — नित्यानंद राय द्वारा लोकसभा में विधेयक पेश

✅ बीते सप्ताह — लोकसभा व राज्यसभा दोनों से विधेयक पारित

📝 31 जुलाई 2026 — विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी हेतु भेजा गया

🖋️ 7 अगस्त 2026 — राष्ट्रपति की मंजूरी, अधिनियम संख्या 12/2026 के रूप में अधिसूचित

📌 मुख्य बात: राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद Registration of Births and Deaths (Amendment) Act, 2026 अब कानून बन चुका है। एक से दो साल की देरी वाले मामलों में अब भी जिला/उप-जिला मजिस्ट्रेट के आदेश से पंजीकरण हो सकेगा, लेकिन दो साल से अधिक की देरी वाले मामलों में अब प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश की अनिवार्यता होगी। सरकार का कहना है कि इससे रिकॉर्ड की विश्वसनीयता बढ़ेगी और फर्जी पंजीकरण पर रोक लगेगी, हालांकि विपक्ष ने इससे आम, गरीब व दूरदराज क्षेत्रों के आवेदकों पर पड़ने वाले बोझ को लेकर चिंता जताई है।

स्रोत: LiveLaw · PRS Legislative Research · Telangana Today · SCC Online · Dynamite News · Navbharat Times · अगस्त 2026।

यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया मूल हिंदी आलेख है।

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