सिद्धार्थनगर: 1968 से चल रहे मदरसे पर चला प्रशासन का बुलडोजर, सपा नेताओं का विरोध
सिद्धार्थनगर: 1968 से चल रहे मदरसे पर चला प्रशासन का बुलडोजर, सपा नेताओं का विरोध
उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए दशकों पुराने मदरसे के एक हिस्से को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के पिपरा रामलाल गांव में की गई, जहां वर्ष 1968 से “अरबिया जियाउल उलूम” नाम से मदरसा संचालित हो रहा था।
सुबह-सुबह शुरू हुई कार्रवाई
प्रशासन की यह कार्रवाई मंगलवार तड़के सुबह करीब साढ़े 5 बजे शुरू हुई। छह बुलडोजरों की मदद से करीब चार घंटे तक चली इस कार्रवाई में मदरसे के उस हिस्से को जमींदोज कर दिया गया, जो कथित तौर पर सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनाया गया था। कार्रवाई के दौरान मौके पर करीब 100 पुलिसकर्मी तैनात रहे।
कितनी जमीन पर हुआ अतिक्रमण?
जानकारी के अनुसार मस्जिद और मदरसे का पूरा परिसर करीब 14 हजार वर्गफीट में फैला हुआ था, जिसमें से करीब 9 हजार वर्गफीट हिस्सा सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा बताया गया। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई डीएम कोर्ट के आदेश पर की गई है।
सपा नेताओं का विरोध, पुलिस से नोकझोंक
मदरसा ध्वस्त किए जाने की खबर फैलते ही समाजवादी पार्टी के कई स्थानीय नेता और कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए और कार्रवाई का विरोध करने लगे। इस दौरान सपा नेताओं और पुलिस प्रशासन के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। विरोध कर रहे लोगों ने आरोप लगाया कि मामला अभी जांच के दायरे में लंबित होने के बावजूद जल्दबाजी में यह कार्रवाई की गई।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
गांव के कुछ स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह मदरसा करीब 58-59 वर्षों से चल रहा था, जहां गरीब बच्चों को उर्दू, हिंदी, अंग्रेजी और विज्ञान जैसे विषय पढ़ाए जाते थे। इलाके के कुछ लोगों ने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने पुराने संस्थान पर कार्रवाई से पहले उचित समय और मौका दिया जाना चाहिए था।
प्रशासन का पक्ष
प्रशासन का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के मकसद से की गई है और नियमानुसार ही आगे बढ़ाई गई। अधिकारियों के अनुसार जिस हिस्से को गिराया गया, वह खेल के मैदान की जमीन पर अवैध रूप से बनाया गया था।
(यह रिपोर्ट स्थानीय समाचार स्रोतों पर आधारित है।)
