सफदरजंग अस्पताल में पहली रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट सर्जरी, 75 साल के बुजुर्ग को मिली नई जिंदगी
सफदरजंग अस्पताल ने रचा नया कीर्तिमान, पहली बार रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट सर्जरी, 75 साल के बुजुर्ग को मिली नई जिंदगी
राजधानी दिल्ली के वीएमएमसी एवं सफदरजंग अस्पताल ने आधुनिक ऑर्थोपेडिक चिकित्सा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल के सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑर्थोपेडिक्स (CIO) में पहली बार रोबोट-असिस्टेड टोटल नी रिप्लेसमेंट (TKR) यानी रोबोट की मदद से घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। सबसे खास बात यह रही कि यह अत्याधुनिक और जटिल ऑपरेशन आयुष्मान भारत योजना के तहत पूरी तरह मुफ्त किया गया।
75 वर्षीय बुजुर्ग मरीज को मिली नई जिंदगी
इस ऐतिहासिक सर्जरी में एक 75 वर्षीय आर्थिक रूप से कमजोर पुरुष मरीज के घुटने का प्रत्यारोपण किया गया। रोबोटिक तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ऑपरेशन से पहले कंप्यूटर आधारित बेहद सटीक योजना तैयार की जाती है। इसके बाद सर्जरी के दौरान इंप्लांट की सही पोजिशनिंग और हड्डियों के अलाइनमेंट को पारंपरिक तरीकों की तुलना में कहीं अधिक सटीकता के साथ अंजाम दिया जा सकता है, जिससे मरीज की रिकवरी बेहतर और तेज होने की संभावना रहती है।
डॉक्टरों की टीम ने संभाला मोर्चा
सफदरजंग अस्पताल की यह पहली रोबोट-असिस्टेड टोटल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी डॉ. भगवती प्रसाद शर्मा के नेतृत्व में हुई, जो कंसल्टेंट प्रोफेसर एवं यूनिट प्रमुख हैं। उनके साथ डॉ. ध्रुवे मेनन और डॉ. कार्तिक यादव ने इस जटिल सर्जरी में अहम भूमिका निभाई। एनेस्थीसिया टीम की अगुवाई डॉ. सुशील गुरिया ने की, जबकि ऑपरेशन थिएटर की नर्सिंग टीम में सिस्टर रेखा और रितिका शामिल रहीं। तकनीकी सहयोग की जिम्मेदारी विजेंद्र ने संभाली।
अस्पताल में रोबोटिक ऑर्थोपेडिक सर्जरी की यह शुरुआत अस्पताल की निदेशक डॉ. कविता शर्मा के नेतृत्व, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन से संभव हो सकी। पूरी प्रक्रिया सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑर्थोपेडिक्स के निदेशक प्रोफेसर डॉ. सुमित सुराल के क्लिनिकल मार्गदर्शन में संपन्न हुई।
आगे हिप और स्पाइन सर्जरी की भी तैयारी
अस्पताल में लगाया गया रोबोटिक प्लेटफॉर्म एक अपग्रेड किए जा सकने वाला सिस्टम है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में इस तकनीक का इस्तेमाल टोटल नी रिप्लेसमेंट के साथ-साथ पार्शियल नी रिप्लेसमेंट और हिप ज्वाइंट रिप्लेसमेंट जैसी सर्जरी में भी किया जा सकेगा। तकनीक और सॉफ्टवेयर के आगे अपग्रेड होने के बाद रोबोट-असिस्टेड स्पाइन सर्जरी की संभावनाएं भी बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
गरीब मरीजों के लिए खुला हाईटेक इलाज का रास्ता
सफदरजंग अस्पताल की यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि अब तक रोबोटिक सर्जरी जैसी महंगी और अत्याधुनिक तकनीक ज्यादातर निजी अस्पतालों तक ही सीमित रही है। इस सर्जरी के जरिए यह साबित हुआ है कि केंद्रीय सरकारी अस्पताल में भी आयुष्मान भारत योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को यह अत्याधुनिक सुविधा पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराई जा सकती है। इससे हाईटेक चिकित्सा सुविधा अब आम और गरीब जनता की पहुंच में आती दिख रही है।
अस्पताल की रोबोटिक सर्जरी में यह पहली उपलब्धि नहीं
गौरतलब है कि यह सफदरजंग अस्पताल की रोबोटिक तकनीक के क्षेत्र में हाल के समय की अकेली उपलब्धि नहीं है। इससे पहले भी अस्पताल के कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी (CTVS) विभाग ने एक ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की थी, जब डॉक्टरों ने एक बेहद दुर्लभ जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित 38 वर्षीय मरीज की दुनिया की पहली रोबोटिक लेफ्ट सिस्टमिक एट्रियोवेंट्रिकुलर (AV) वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी सफलतापूर्वक की थी। उस मरीज का दिल सामान्य लोगों की तरह बाईं ओर नहीं, बल्कि दाईं ओर था और उसकी रक्त वाहिकाएं भी असामान्य स्थिति में थीं। इस जटिल हृदय सर्जरी को सीने की हड्डी काटे बिना, छोटे-छोटे छेदों के जरिए ही अंजाम दिया गया था।
सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में तकनीक का नया दौर
पहली रोबोटिक घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी की सफलता ने सफदरजंग अस्पताल में तकनीक आधारित ऑर्थोपेडिक सेवाओं के एक नए दौर की शुरुआत कर दी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इसे भारत की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में रोबोटिक सर्जरी की पहुंच बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और अहम कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में उम्मीद जताई जा रही है कि देश के अन्य सरकारी अस्पतालों में भी इस तरह की अत्याधुनिक तकनीक को अपनाया जा सकेगा, जिससे आम जनता को बेहतर और सटीक इलाज की सुविधा मिल सकेगी।
(यह रिपोर्ट विभिन्न समाचार स्रोतों पर आधारित है।)
