पहली बार एहसास हुआ…’: भारतीय महिला ने की भारत-भूटान की तुलना; साफ हवा और नो रोड रेज देखकर रह गई हैरान’1 min read
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पहली बार एहसास हुआ…’: भारतीय महिला ने की भारत और भूटान की तुलना, साफ हवा, सुरक्षित सड़कें और नो रोड रेज देखकर रह गई हैरान
एक भारतीय कंटेंट क्रिएटर महिला द्वारा भारत और भूटान के बीच की गई तुलना सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोर रही है। महिला ने अपने हालिया भूटान दौरे के दौरान पड़ोसी देश की साफ-सुथरी सड़कों, शांत माहौल, ट्रैफिक अनुशासन और सुरक्षा की भावना को रेखांकित किया है, जिस पर इंटरनेट यूजर्स लगातार अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
यह वीडियो इंस्टाग्राम कंटेंट क्रिएटर नेहा राणा (@finding.neha) ने शेयर किया है। वीडियो में उन्होंने दोनों देशों के सीमावर्ती इलाकों और वहां के माहौल के बीच के बड़े अंतर को दिखाया है।
भारत से भूटान में प्रवेश करते ही दिखा बड़ा अंतर
नेहा राणा ने अपने वीडियो की शुरुआत भारत-भूटान सीमा के भारतीय हिस्से से की। उन्होंने भारत की तरफ सड़कों पर भारी ट्रैफिक, गलत साइड से गाड़ी चलाना, सड़कों के किनारे फैला कचरा, बेवजह हॉर्न बजाना (Honking) और पुरुषों द्वारा घूरने जैसी रोजमर्रा की समस्याओं को कैमरे में दिखाया।इसके बाद जैसे ही उन्होंने भूटान की सीमा में कदम रखा, वहां का नजारा पूरी तरह बदला हुआ था। नेहा ने भूटान की एक व्यस्त सड़क पर चलते हुए अपना अनुभव साझा किया और कहा, “यहाँ मैं खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस कर रही हूँ। सड़कों पर कोई बेवजह हॉर्न नहीं बजा रहा और हर तरफ साफ-सफाई है।
“बिना ट्रैफिक लाइट के भी बेहतरीन अनुशासन
कंटेंट क्रिएटर ने भूटान के बेमिसाल ट्रैफिक अनुशासन की जमकर तारीफ की। उन्होंने वीडियो में दिखाया कि भूटान में सड़कों पर कोई ट्रैफिक लाइट नहीं है, इसके बावजूद हर एक वाहन अपनी ही लेन में बेहद अनुशासित तरीके से चल रहा था। इतना ही नहीं, जैसे ही कोई पैदल यात्री जेब्रा क्रॉसिंग से सड़क पार करने की कोशिश करता, गाड़ियाँ खुद-ब-खुद उन्हें रास्ता देने के लिए रुक जाती थीं।
‘मेरा मकसद भारत को नीचा दिखाना नहीं, बल्कि…’
नेहा राणा ने स्पष्ट किया कि उनका यह वीडियो बनाने का मकसद अपने देश भारत को नीचा दिखाना बिल्कुल नहीं है, बल्कि वह यह बताना चाहती हैं कि सार्वजनिक स्थानों को बेहतर बनाए रखने में व्यक्तिगत जिम्मेदारी कितनी मायने रखती है।
उन्होंने वीडियो में कहा, “मुझे यहाँ आकर यह एहसास हुआ कि भूटान के लोग अपने आसपास के माहौल की खुद जिम्मेदारी लेते हैं, जबकि भारत में कोई इस बारे में सोचता ही नहीं है।” उन्होंने आगे कहा कि अगर भारत के लोग भी अपने परिवेश के प्रति जागरूक हो जाएं, तो भारतीय शहर भी पूरी तरह बदल सकते हैं।
30 साल में पहली विदेश यात्रा और बदला नजरिया
नेहा ने अपनी पोस्ट के कैप्शन में लिखा कि भारत में पैदा होने और वहीं पले-बढ़े होने के कारण उन्होंने प्रदूषण, बेवजह का शोर, ट्रैफिक जाम और सुरक्षा संबंधी चिंताओं जैसी कई चीजों को अपनी जिंदगी का सामान्य हिस्सा मान लिया था।
उन्होंने लिखा, “30 साल की उम्र में यह मेरी पहली विदेश यात्रा थी। भूटान आने के बाद पहली बार मुझे यह एहसास हुआ कि हमारी रोजमर्रा की जिंदगी असल में कितनी अलग और शांतिपूर्ण हो सकती है।”उन्होंने आगे लिखा, “वहाँ मुझे ऐसी सड़कें दिखीं जहाँ कोई रोड रेज (गुस्सा) नहीं था, हवा बेहद साफ थी और माहौल पूरी तरह सुरक्षित था।
मैं रात में बिना किसी डर के सड़कों पर अकेली घूम सकती थी और कोई मुझे बिना वजह घूरने वाला नहीं था। सबसे अजीब बात यह है कि भूटान के लोगों के लिए यह सब कोई असाधारण बात नहीं है, बल्कि यह उनके लिए एक बुनियादी जरूरत (Bare Minimum) है। इससे मैंने सीखा कि लोग सामूहिक रूप से अपने रहने की जगह और दूसरों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं, यह सब उसी का नतीजा है।”
WORLD EYE BHARAT NEWS
