बेंगलुरु में अंडर-कंस्ट्रक्शन मकान बना ‘नकली नोटों’ का अड्डा
🚨 बेंगलुरु में अंडर-कंस्ट्रक्शन मकान बना ‘नकली नोटों’ का अड्डा: पुलिस की गुप्त रेड में 7 मास्टरमाइंड गिरफ्तार, ₹5 लाख की सामग्री बरामद
📅 अपडेटेड: सितंबर 01, 2026
⏱️ रीडिंग टाइम: 3 मिनट
📌 केस के मुख्य बिंदु (Quick Insights)
- ठिकाना: रामनगर के आइतूर इलाके में एक आधा बना (नवनिर्मित) सुनसान मकान।
- बरामदगी: ₹5 लाख मूल्य के जाली नोटों के स्पेशल पेपर बंडल और हाई-ग्रेड केमिकल।
- मॉडस ऑपेरेंडी: किसी को शक न हो, इसलिए सुनसान कंस्ट्रक्शन साइट पर लगाया पूरा प्रिंटिंग सेटअप।
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के दक्षिण जिले से आर्थिक अपराध का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों के भी कान खड़े कर दिए हैं। स्थानीय पुलिस ने एक बेहद सटीक और खुफिया इनपुट के आधार पर कार्रवाई करते हुए, शहर में सक्रिय जाली भारतीय मुद्रा (FICN) छापने वाले एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने जाल बिछाकर इस गिरोह से जुड़े 7 मुख्य आरोपियों को रंगे हाथों दबोचा है।
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कैसे मिला सुराग? पुलिस की खुफिया विंग का ऑपरेशन
शुरुआती जांच और सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, बेंगलुरु पुलिस की स्पेशल विंग को पिछले कुछ दिनों से बाजार में नकली नोटों के सर्कुलेशन की शिकायतें मिल रही थीं। पुलिस इस गिरोह के जमीनी सप्लायर्स (पैडलर्स) पर नजर रख रही थी। कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस टीम रामनगर के आइतूर औद्योगिक क्षेत्र के पास स्थित एक सुनसान इलाके तक पहुंची, जहां से इस पूरे सिंडिकेट को ऑपरेट किया जा रहा था।
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मास्टरमाइंड का ठिकाना: आधा बना मकान क्यों चुना?
इस केस में सबसे चौंकाने वाली बात आरोपियों द्वारा चुना गया ठिकाना है। आमतौर पर ऐसे धंधे बंद कमरों या बेसमेंट में होते हैं, लेकिन इस गिरोह ने एक नवनिर्मित (अंडर-कंस्ट्रक्शन) मकान को अपनी अवैध फैक्ट्री बनाया। इसके पीछे इनका मुख्य मकसद यह था कि दिनभर निर्माण कार्य और मजदूरों की आवाजाही के बहाने भारी मशीनरी, कागज के बंडल और रसायनों को आसानी से अंदर लाया जा सके और पड़ोसियों या स्थानीय प्रशासन को जरा भी भनक न लगे।
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हाई-टेक सेटअप और ₹5 लाख के कच्चे माल की जब्ती
जब पुलिस की टीमों ने एक साथ उक्त मकान पर धावा बोला, तो वहां बाकायदा एक मिनी प्रिंटिंग प्रेस जैसी व्यवस्था मिली। पुलिस ने मौके से करीब 5 लाख रुपये मूल्य के जाली नोट तैयार करने के लिए रखे गए विशेष कागजों के बंडल बरामद किए हैं। इसके अलावा, असली नोटों जैसा टेक्सचर और रंग देने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले उच्च गुणवत्ता वाले केमिकल, कटर मशीन, स्क्रीन प्रिंटिंग फ्रेम और अन्य तकनीकी उपकरण जब्त किए गए हैं।
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रिसर्च विश्लेषण: आगे क्या होगी जांच की दिशा?
गिरफ्तार किए गए सातों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, अब जांच का दायरा दो मुख्य बिंदुओं पर केंद्रित है:
“पहला, यह गिरोह इन नकली नोटों को खपाने के लिए किन-किन स्थानीय बाजारों और कूरियर नेटवर्कों का इस्तेमाल कर रहा था? दूसरा, जाली नोट छापने के लिए इस्तेमाल होने वाला यह विशेष केमिकल और वॉटरमार्क वाला कागज इन्हें किस सोर्स या राज्य से सप्लाई किया जा रहा था?”
इस बड़ी कामयाबी से बेंगलुरु में त्योहारों के सीजन से ठीक पहले बाजार में बड़े पैमाने पर नकली करेंसी खपाने की एक बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया गया है। पुलिस जल्द ही इस गिरोह के इंटर-स्टेट (अंतर्राज्यीय) कनेक्शन का खुलासा कर सकती है।
