विपक्ष का सुप्रीम कोर्ट मार्च: मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन1 min read
विशेष रिपोर्ट
अपडेटेड: अक्टूबर 2026
मुख्य बातें (Key Highlights):
- प्रमुख प्रदर्शन: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के शीर्ष नेताओं के नेतृत्व में हजारों विपक्षी कार्यकर्ताओं और सांसदों ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला।
- मुख्य मांगें: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रोकने, कथित अनियमितताओं की जांच और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग।
- याचिका/ज्ञापन: सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक विस्तृत याचिका और 10-सूत्रीय ज्ञापन प्रस्तुत कर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई है।
विस्तृत समाचार (Detailed News):
नई दिल्ली:
देश की राजधानी दिल्ली में चुनावी प्रक्रिया और निष्पक्षता को लेकर राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) और कथित मतदान अनियमितताओं के विरोध में INDIA गठबंधन के बैनर तले एक विशाल मार्च निकाला गया। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव समेत कई दिग्गज विपक्षी नेता और हजारों प्रदर्शनकारी इस मार्च में शामिल हुए।
सुप्रीम कोर्ट तक मार्च और प्रदर्शन
निर्धारित योजना के तहत विपक्षी नेताओं और नागरिकों का यह काफिला केंद्रीय दिल्ली से होता हुआ सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़ा। हालांकि, पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और विभिन्न स्थानों पर भारी बैरिकेडिंग की गई थी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
विपक्ष का आरोप है कि SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया के तहत बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए एक 10-सूत्रीय ज्ञापन सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया, जिसमें मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच और सुधार की गुहार लगाई गई है।
राजनीतिक बयानबाजी और सुरक्षा व्यवस्था
इस बड़े प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया था। विपक्षी दलों ने सरकार और चुनाव आयोग पर सांठगांठ का आरोप लगाया है, जबकि सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए विपक्षी दलों पर जनता को गुमराह करने और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने का गंभीर आरोप लगाया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले के तूल पकड़ने से आने वाले दिनों में राजनीतिक घमासान और तेज होने के आसार हैं।
(सोर्स: द हिंदू, इंडिया टुडे, पीटीआई और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स से प्राप्त प्रारंभिक सूचनाएं)
(डिस्क्लेमर: यह खबर मीडिया सोर्सेज और प्रारंभिक सूचनाओं के आधार पर तैयार की गई है। इस खबर में दिए गए राजनीतिक दावों और तथ्यों की पुष्टि हमारी वेबसाइट स्वतंत्र रूप से नहीं करती है।)
