सुप्रीम कोर्ट की डीजीपी नियुक्तियों पर कड़ी नजर: झारखंड के बाद अब देशव्यापी स्तर पर समीक्षा के निर्देश1 min read
कानूनी एवं प्रशासनिक ब्यूरो | विशेष रिपोर्ट
अपडेटेड: अक्टूबर 2026
मुख्य बातें (Key Highlights):
- दायरा विस्तृत: सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के पुलिस महानिदेशक (DGP) की चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाने के बाद अब डीजीपी नियुक्ति से जुड़े कानूनों और नियमों की देशव्यापी (Nationwide) समीक्षा का दायरा बढ़ा दिया है।
- न्यायालय का रुख: अदालत ने स्पष्ट किया है कि उसका मुख्य उद्देश्य ऐतिहासिक ‘प्रकाश सिंह मामले’ (Prakash Singh Case) के दिशानिर्देशों का उल्लंघन या उन्हें कमजोर (Dilute) होने से रोकना है, चाहे किसी भी राज्य में किसी भी दल की सरकार हो।
- amicus curiae की नियुक्ति: शीर्ष अदालत ने एमिकस क्यूरी (Amicus Curiae) को निर्देश दिया है कि वे संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सहायता से अन्य राज्यों के पुलिस सेवा नियमों की भी जांच करें ताकि यह पता चल सके कि क्या वे सुप्रीम कोर्ट के मानकों के अनुरूप हैं।
विस्तृत समाचार (Detailed News):
नई दिल्ली:
देशभर में पुलिस महानिदेशक (DGP) के चयन और नियुक्तियों को लेकर प्रशासनिक व राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड में पुलिस प्रमुख के चयन और वहां के नए नियमों को चुनौती देने वाले मामले की सुनवाई करते हुए इसके दायरे को पूरे देश में लागू कर दिया है। अदालत ने राज्य सरकारों द्वारा डीजीपी की नियुक्ति प्रक्रिया में कथित मनमानी और सेवा नियमों में बदलाव पर कड़ी आपत्ति जताई है।
झारखंड के नियमों और चयन प्रक्रिया पर सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने पाया कि झारखंड सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के तहत ऐसे अधिकारियों को भी डीजीपी पद के लिए विचार किया जा रहा है, जिनका सेवाकाल (Residual Service) बहुत कम बचा है। अदालत ने कहा कि यह प्रावधान वर्ष 2006 के ऐतिहासिक ‘प्रकाश सिंह जजमेंट’ और बाद के दिशा-निर्देशों के प्रथम दृष्टया विपरीत प्रतीत होता है। अदालत ने झारखंड सरकार को अपनी 2025 की नियमावली की पुनः समीक्षा (Revisit) करने का निर्देश दिया है।
अन्य राज्यों के नियमों की भी होगी जांच
विवाद केवल एक राज्य तक सीमित न रहकर अब राष्ट्रीय स्तर पर फैल गया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि कई अन्य राज्यों में भी इसी तरह के प्रावधान या फेरबदल किए जा रहे हैं ताकि मनपसंद अधिकारियों को डीजीपी के पद पर नियुक्त किया जा सके। इस पर रोक लगाने के लिए अदालत ने एमिकस क्यूरी को देश के अन्य राज्यों के पुलिस सेवा नियमों का बारीकी से अध्ययन करने का निर्देश दिया है ताकि सभी राज्यों में डीजीपी चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और एकरूपता सुनिश्चित की जा सके।
(सोर्स: द हिंदू, लाइव लॉ और सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाहियों से प्राप्त विवरण)
(डिस्क्लेमर: यह खबर कानूनी रिपोर्टिंग और अदालत की कार्यवाहियों से जुड़ी प्रारंभिक सूचनाओं के आधार पर तैयार की गई है। इस मामले में आगामी न्यायिक आदेशों की पुष्टि आधिकारिक कानूनी पोर्टलों से की जा सकती है।)
