बढ़नी में दो दिन के नवजात की मौत से मचा हड़कंप, डीजे के शोर पर उठे सवाल; पहले ही दी गई थी हिदायत!1 min read
ब्रेकिंग न्यूज़ | सिद्धार्थनगर, उत्तर प्रदेश
बढ़नी (सिद्धार्थनगर)। सिद्धार्थनगर जिले के बढ़नी कस्बे में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान दो दिन के नवजात की मौत का मामला सामने आने के बाद इलाके में शोक और चर्चा का माहौल है। घटना ढेबरुआ थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर 9 स्थित रामलीला मैदान से जुड़ी बताई जा रही है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि विसर्जन के दौरान डीजे की तेज आवाज और कंपन के बीच नवजात की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उसकी मौत हो गई। हालांकि, बच्चे की मौत का वास्तविक कारण अभी चिकित्सकीय पुष्टि और जांच का विषय है।
18 अक्टूबर को हुआ था जन्म
परिजनों के मुताबिक, नवजात का जन्म 18 अक्टूबर को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी), बढ़नी में हुआ था। बच्चे की मां सबरून्निशा का दावा है कि घटना वाली रात करीब 11:30 बजे बच्चा रोया और इसके बाद उसकी सांसें थम गईं। नवजात की मौत से परिवार में कोहराम मच गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
घटना की सूचना मिलने के बाद रात करीब 2:15 बजे शोहरतगढ़ के क्षेत्राधिकारी मयंक द्विवेदी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। परिजनों से मुलाकात कर उन्होंने मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया।
पीस कमेटी की बैठक में पहले ही दी गई थी हिदायत
इस घटना के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल डीजे की तेज आवाज और ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों के पालन को लेकर उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि त्योहार से पहले 5 अक्टूबर को जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन और एसएसपी डॉ. अभिषेक महाजन से डीजे के तेज शोर को लेकर शिकायत की गई थी।
वहीं, सामने आई जानकारी के मुताबिक, त्योहार से पहले आयोजित पीस कमेटी की बैठक में भी तेज आवाज में डीजे बजाने को लेकर प्रशासन की ओर से हिदायत दी गई थी। बैठक में मौजूद लोगों को शांति व्यवस्था बनाए रखने और निर्धारित नियमों का पालन करने की आवश्यकता बताई गई थी।
ऐसे में स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि जब तेज आवाज को लेकर पहले से शिकायतें की जा रही थीं और प्रशासन की ओर से हिदायत भी दी गई थी, तो विसर्जन कार्यक्रम के दौरान ध्वनि नियंत्रण के नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए क्या कदम उठाए गए?
प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग
नवजात की मौत की घटना ने सार्वजनिक आयोजनों में ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण और प्रशासनिक निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। लोगों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि घटना की परिस्थितियों और नवजात की मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सके।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि फिलहाल डीजे की आवाज को नवजात की मौत का कारण बताने वाला दावा परिजनों का आरोप है। केवल घटना के समय तेज आवाज मौजूद होने से मौत का कारण साबित नहीं होता। इसके लिए चिकित्सकीय तथ्यों और जांच के निष्कर्षों का सामने आना आवश्यक है।
यदि जांच में ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों के उल्लंघन या किसी स्तर पर लापरवाही की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब सबसे बड़ा सवाल…
जब त्योहार से पहले ही डीजे की तेज आवाज को लेकर शिकायतें की गई थीं और पीस कमेटी की बैठक में हिदायत भी दी गई थी, तो क्या विसर्जन के दौरान निर्धारित नियमों का पालन कराया गया?
क्या प्रशासन की ओर से ध्वनि प्रदूषण पर प्रभावी निगरानी रखी गई थी? और सबसे अहम, नवजात की मौत की वास्तविक वजह क्या थी?
इन सवालों के जवाब निष्पक्ष जांच और चिकित्सकीय पुष्टि के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
धार्मिक आयोजन आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता के प्रतीक हैं। लेकिन त्योहारों की खुशियों के बीच आम नागरिकों, बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों की सुरक्षा तथा स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है।
फिलहाल, इस दुखद घटना ने बढ़नी में डीजे के शोर, ध्वनि प्रदूषण के नियमों और सार्वजनिक आयोजनों के दौरान प्रशासनिक निगरानी को लेकर बहस छेड़ दी है। अब लोगों की निगाहें जांच और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
रिपोर्टर:- फहीम खान
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नोट: शिकायतों, पीस कमेटी की बैठक और प्रशासन के आश्वासन से संबंधित विवरण उपलब्ध जानकारी एवं स्थानीय लोगों के दावों पर आधारित हैं। संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष और जांच के निष्कर्ष सामने आने पर खबर को अपडेट किया जाना चाहिए।
