अयोध्या-गोंडा सिक्स लेन बाईपास परियोजना का डिजाइन मंत्रालय भेजा गया — लखनऊ, बस्ती और गोंडा को मिलेगी बड़ी राहतअयोध्या-गोंडा सिक्स लेन बाईपास योजना
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अयोध्या-गोंडा सिक्स लेन बाईपास परियोजना का डिजाइन मंत्रालय भेजा गया — लखनऊ, बस्ती और गोंडा को मिलेगी बड़ी राहत
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) · सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय
अयोध्या और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के लिए बहुप्रतीक्षित सिक्स लेन बाईपास परियोजना का डिजाइन अब केंद्रीय मंत्रालय को भेज दिया गया है। इस परियोजना से लखनऊ, बस्ती और गोंडा जिलों को सीधा फायदा मिलेगा और अयोध्या के चारों ओर एक रिंग रोड जैसी व्यवस्था तैयार होगी।
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67.57 किमी
कुल बाईपास लंबाई
दो पैकेजों में विभाजित |
3 जिले
लखनऊ, बस्ती और गोंडा
से होकर गुजरेगा मार्ग |
4/6 लेन
ग्रीनफील्ड हाईवे
के रूप में निर्माण |
क्या है पूरा मामला?
केंद्र सरकार की PM गति शक्ति योजना के तहत आगे बढ़ रही अयोध्या बाईपास परियोजना का डिजाइन अब आधिकारिक स्वीकृति के लिए केंद्रीय मंत्रालय को भेज दिया गया है। यह परियोजना कुल 67.57 किलोमीटर लंबी है और इसे दो हिस्सों में बांटा गया है — उत्तरी अयोध्या बाईपास (35.40 किमी) और दक्षिणी अयोध्या बाईपास (32.172 किमी)।
यह ग्रीनफील्ड बाईपास गोंडा जिले के माहेशपुर गांव के पास NH-28 से शुरू होकर बस्ती जिले के माझौवा दुबे गांव के पास NH-28 पर ही समाप्त होगा। इस मार्ग के निर्माण में गोंडा जिले के 11, अयोध्या जिले के 34 और बस्ती जिले के 13 राजस्व गांव शामिल होंगे। परियोजना का मुख्य उद्देश्य अयोध्या शहर से गुजरने वाले भारी वाहनों के दबाव को कम करना और तीर्थयात्रियों व स्थानीय निवासियों दोनों के लिए यातायात को सुगम बनाना है।
“यह परियोजना आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक केंद्रों तक कनेक्टिविटी में सुधार लाएगी, जिसमें इन तीन जिलों के पर्यटन और तीर्थ स्थल भी शामिल हैं।”
— भारत सरकार की आधिकारिक PM गति शक्ति रिपोर्ट
परियोजना की प्रमुख विशेषताएं
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✅ मार्ग व संपर्क
✅ सरयू नदी पर 2 पुल — अयोध्या को बस्ती व गोंडा से जोड़ेंगे ✅ 7 फ्लाईओवर व 4 रेलवे ओवरब्रिज प्रस्तावित ✅ 16 अंडरपास सुगम आवागमन के लिए ✅ अयोध्या रेलवे स्टेशन, सोहावल, ए.एन. देव नगर व अयोध्या कैंट स्टेशनों से जुड़ाव |
📊 यातायात व आर्थिक प्रभाव
📌 2023 में करीब 89,023 वाहनों का दैनिक अनुमानित दबाव 📌 2033 तक यह आंकड़ा बढ़कर 2,16,928 वाहन तक पहुंचने का अनुमान 📌 NH-27, NH-330, NH-330A व NH-135A तक यात्रा समय में कमी 📌 चमड़ा, इंजीनियरिंग सामान, निर्माण सामग्री जैसे माल ढुलाई में सुगमता |
निर्माण की मौजूदा स्थिति
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस परियोजना के लिए हाइब्रिड एन्युटी मोड (HAM) के तहत निर्माण कंपनी का चयन कर लिया है। निर्माण कंपनी सिएगल इंडिया लिमिटेड को दोनों पैकेजों (उत्तरी व दक्षिणी बाईपास) के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी घोषित किया गया था। परियोजना के लिए बोलियां दिसंबर 2022 में आमंत्रित की गई थीं, जिसमें कुल 17 कंपनियों ने तकनीकी चरण पास किया।
अनुमानित लागत करीब 1,386.51 करोड़ रुपये है, जबकि कुछ रिपोर्टों में परियोजना की कुल लागत करीब 435.6 मिलियन डॉलर (लगभग 3,600 करोड़ रुपये) तक आंकी गई है, जिसमें भूमि अधिग्रहण और अन्य संबद्ध कार्य भी शामिल हैं। निर्धारित समयसीमा के अनुसार परियोजना को ढाई साल के भीतर पूरा किए जाने का लक्ष्य रखा गया है।
परियोजना का घटनाक्रम
📅 समयरेखा
📋 पूर्व में — NHDP फेज-VII के तहत परियोजना का प्रस्ताव तैयार किया गया
📄 दिसंबर 2022 — NHAI ने दोनों पैकेजों के लिए बोलियां आमंत्रित कीं
🔍 फरवरी 2024 — तकनीकी बोलियां खोली गईं, 16-17 कंपनियों ने भाग लिया
🏗️ सितंबर 2024 — सिएगल इंडिया को निर्माण अनुबंध के लिए सबसे कम बोलीदाता घोषित किया गया
📤 हाल ही में — परियोजना का अंतिम डिजाइन स्वीकृति के लिए मंत्रालय को भेजा गया
क्षेत्र के लिए क्या मायने रखती है यह परियोजना?
अयोध्या, लखनऊ और गोरखपुर जैसे दो प्रमुख आर्थिक केंद्रों के बीच स्थित है, और यहां से चमड़ा, इंजीनियरिंग सामान, निर्माण सामग्री तथा लोहा-इस्पात जैसी वस्तुओं की भारी ढुलाई होती है। बाईपास बन जाने से शहर के भीतर से गुजरने वाले भारी वाहनों का दबाव कम होगा, जिससे न सिर्फ यातायात जाम की समस्या घटेगी बल्कि माल की आवाजाही भी तेज और सुगम होगी। अयोध्या में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के शुरू होने के बाद बढ़ते तीर्थयात्री और पर्यटक यातायात को देखते हुए भी यह परियोजना क्षेत्रीय ढांचागत विकास के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।
📌 मुख्य बात: 67.57 किलोमीटर लंबी अयोध्या-गोंडा सिक्स लेन बाईपास परियोजना का डिजाइन अब मंत्रालय को भेज दिया गया है। यह परियोजना लखनऊ, बस्ती और गोंडा जिलों से होकर गुजरेगी, अयोध्या के चारों ओर एक रिंग रोड जैसी संरचना तैयार करेगी और शहर के भीतर बढ़ते यातायात दबाव को घटाएगी। NHAI पहले ही निर्माण कंपनी का चयन कर चुका है और परियोजना को ढाई साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
स्रोत: PIB (भारत सरकार) · Global Highways · The Metro Rail Guy · Zee News · Jagran (डिजाइन प्रस्तुति रिपोर्ट)।
यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया मूल हिंदी आलेख है।
