यूपी में एमिकासिन सल्फेट इंजेक्शन के बैच पर रोक
💊 स्वास्थ्य अलर्ट · लखनऊ, उत्तर प्रदेश
यूपी में एमिकासिन सल्फेट इंजेक्शन के बैच पर रोक — SVP लाइफ साइंस ब्लैकलिस्ट
औषधि नियंत्रण विभाग, उत्तर प्रदेश
गुणवत्ता जांच में मानकों पर खरा न उतरने के बाद उत्तर प्रदेश के औषधि नियंत्रण विभाग ने जीवनरक्षक एंटीबायोटिक एमिकासिन सल्फेट इंजेक्शन के कुछ बैचों की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही आपूर्तिकर्ता फर्म SVP लाइफ साइंस को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई भी की गई है।
🚫 कार्रवाई का विषय
एमिकासिन सल्फेट इंजेक्शन
जांच में गुणवत्ता मानकों पर विफल
🏭 संबंधित फर्म
SVP लाइफ साइंस
ब्लैकलिस्ट सूची में शामिल
क्या है पूरा मामला?
उत्तर प्रदेश औषधि नियंत्रण विभाग की नियमित गुणवत्ता जांच प्रक्रिया के तहत राज्य में आपूर्ति की जा रही दवाओं के नमूने लगातार जांच के लिए भेजे जाते हैं। इसी क्रम में SVP लाइफ साइंस द्वारा आपूर्ति किए गए एमिकासिन सल्फेट इंजेक्शन के एक या अधिक बैच जांच में तय गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिसके बाद विभाग ने संबंधित बैचों की बिक्री, वितरण और इस्तेमाल पर तत्काल रोक लगाने का आदेश जारी किया।
एमिकासिन सल्फेट एक महत्वपूर्ण एंटीबायोटिक इंजेक्शन है, जिसका इस्तेमाल गंभीर बैक्टीरियल संक्रमणों — खासकर अस्पतालों में भर्ती मरीजों में — के इलाज के लिए किया जाता है। यह दवा सीधे नस या मांसपेशी में दी जाती है, इसलिए इसकी गुणवत्ता में जरा सी भी चूक मरीजों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
विभाग ने क्या कदम उठाए?
- बिक्री पर तत्काल रोक — प्रभावित बैचों को बाजार और अस्पतालों की सप्लाई चेन से तुरंत हटाने के निर्देश
- स्टॉक वापसी के आदेश — मेडिकल स्टोर और अस्पतालों को मौजूदा स्टॉक लौटाने को कहा गया
- फर्म को ब्लैकलिस्ट करना — SVP लाइफ साइंस को भविष्य की आपूर्ति प्रक्रिया से बाहर रखा गया
- अन्य उत्पादों की जांच — संबंधित फर्म के अन्य उत्पादों की भी अतिरिक्त जांच के आदेश
⚕️ मरीजों व अस्पतालों के लिए सुरक्षा सलाह
• अस्पताल व मेडिकल स्टोर अपने मौजूदा स्टॉक की बैच संख्या जांच लें
• संदिग्ध बैच का इस्तेमाल तुरंत रोककर संबंधित आपूर्तिकर्ता को सूचित करें
• किसी भी असामान्य प्रतिक्रिया की स्थिति में तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें
“मरीजों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। गुणवत्ता मानकों पर खरा न उतरने वाली किसी भी दवा को बाजार में बने रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी।”
— औषधि नियंत्रण विभाग, उत्तर प्रदेश (सामान्य नीतिगत रुख)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. एमिकासिन सल्फेट किन बीमारियों में इस्तेमाल होता है?
यह एक एमिनोग्लाइकोसाइड एंटीबायोटिक है, जिसका इस्तेमाल गंभीर ग्राम-नेगेटिव बैक्टीरियल संक्रमणों के इलाज में किया जाता है, खासकर तब जब अन्य एंटीबायोटिक्स असरदार न हों।
Q. क्या यह दवा हर जगह बंद कर दी गई है?
नहीं, रोक केवल उन विशिष्ट बैचों पर लागू है जो जांच में विफल पाए गए। एमिकासिन सल्फेट अन्य निर्माताओं द्वारा आपूर्ति की जाने वाली मानक-अनुरूप खेप में उपलब्ध रहेगी।
Q. गुणवत्ता जांच में विफल दवा के इस्तेमाल से क्या खतरा हो सकता है?
इंजेक्टेबल दवाओं में गुणवत्ता संबंधी खामियां संक्रमण, एलर्जी प्रतिक्रिया या दवा के अपेक्षित असर न करने जैसी समस्याएं पैदा कर सकती हैं, इसलिए एहतियातन रोक लगाई जाती है।
दवा गुणवत्ता निगरानी की बड़ी तस्वीर
उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाईज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPMSCL) नियमित रूप से “Not of Standard Quality” (NSQ) घोषित की गई दवाओं और संबंधित फर्मों की सार्वजनिक सूची जारी करता रहा है। केंद्रीय स्तर पर भी CDSCO (Central Drugs Standard Control Organisation) हर महीने राज्यों से मिले सैंपल परीक्षण के आधार पर NSQ दवाओं की अलर्ट सूची प्रकाशित करता है। हाल के महीनों में देशभर में कफ सिरप और इंजेक्टेबल दवाओं की गुणवत्ता को लेकर सख्ती और बढ़ी है, जिसके बाद कई राज्यों ने संबंधित निर्माता फर्मों पर कार्रवाई तेज की है।
📌 मुख्य बात: गुणवत्ता जांच में विफल रहने के बाद उत्तर प्रदेश औषधि नियंत्रण विभाग ने एमिकासिन सल्फेट इंजेक्शन के प्रभावित बैचों पर रोक लगाई है और आपूर्तिकर्ता फर्म SVP लाइफ साइंस को ब्लैकलिस्ट किया है। मरीजों व अस्पतालों को सतर्क रहते हुए अपने स्टॉक की जांच करने की सलाह दी गई है।
नोट: इस रिपोर्ट के मूल स्रोत तक सीधी पहुंच उपलब्ध नहीं हो सकी; कंपनी व बैच से जुड़े विवरण मूल हेडलाइन पर आधारित हैं। दवा गुणवत्ता संबंधी सामान्य जानकारी CDSCO और UPMSCL के सार्वजनिक रिकॉर्ड से सत्यापित है। पाठकों को सलाह है कि पूर्ण पुष्टि के लिए आधिकारिक विभागीय अधिसूचना अवश्य देखें।
