₹4,700 करोड़ का कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे एक ही दिन में 10 जगह धंसा! उद्घाटन के सिर्फ 27 दिन बाद बड़ा खुलासा — इंजीनियर हटाए गए, टोल वसूली रुकी visual ai
₹4,700 करोड़ का कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे एक ही दिन में 10 जगह धंसा! उद्घाटन के सिर्फ 27 दिन बाद बड़ा खुलासा — इंजीनियर हटाए गए, टोल वसूली रुकी
13 जुलाई को नितिन गडकरी ने बड़े जोश के साथ उद्घाटन किया था। बारिश ने खोल दी पोल — पंखों से सड़क सुखाने का वीडियो वायरल, अखिलेश यादव ने साधा निशाना, NHAI ने PNC Infratech के खिलाफ की कार्रवाई।
NHAI · कोरारी गांव, उन्नाव · PNC इंफ्राटेक · अवध एक्सप्रेसवे (NE-6)
27 दिन
₹67 Cr
3 इंजीनियर
🚨 ताज़ा अपडेट: कोरारी में शुरुआती नुकसान के बाद अब ताज़ा नुकसान की खबरें आ रही हैं — एक ही दिन में 10 अलग-अलग जगहों पर सड़क धंसने की घटनाएं सामने आई हैं। NHAI ने पूरे एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली रोक दी है जब तक मरम्मत का काम पूरा नहीं हो जाता।
कैसे शुरू हुई यह पूरी कहानी?
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने 13 जुलाई 2026 को अपने X (ट्विटर) अकाउंट पर बड़े गर्व से एलान किया — “कानपुर-लखनऊ नेशनल एक्सप्रेसवे (NE-6), लगभग 63 किलोमीटर लंबा 6-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे, 2 पैकेज में विकसित किया गया है। यह एक्सप्रेसवे लखनऊ रिंग रोड, कानपुर रिंग रोड, NH-27 और NH-31 को जोड़ते हुए दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय लगभग 3 घंटे से घटाकर सिर्फ 40 मिनट कर देगा।”
लेकिन यह जश्न ज़्यादा दिन नहीं टिका। उद्घाटन के सिर्फ 12 दिन बाद — 25 जुलाई (शनिवार) को — उन्नाव के कोरारी गांव के पास एक्सप्रेसवे का एक हिस्सा धंस गया। समाजवादी पार्टी नेता मधुसूदन यादव ने सबसे पहले इसका वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने दावा किया कि लगभग 5 से 7 मीटर सड़क धंस गई थी।
“मैं लखनऊ-कानपुर एलिवेटेड एक्सप्रेसवे पर यात्रा कर रहा था और जैसे ही कोरारी पहुंचा, मैंने देखा कि बारिश के बाद सड़क कैसे टूट गई थी।” — मधुसूदन यादव, समाजवादी पार्टी नेता
“मैं लखनऊ-कानपुर एलिवेटेड एक्सप्रेसवे पर यात्रा कर रहा था और जैसे ही कोरारी पहुंचा, मैंने देखा कि बारिश के बाद सड़क कैसे टूट गई थी।”
पंखों से सड़क सुखाने का वायरल वीडियो — पूरा मामला
विवाद तब और बढ़ गया जब उन्नाव के बेगमखेड़ा गांव के पास एक्सप्रेसवे के पानी से भरे हिस्से को सुखाने के लिए मज़दूरों द्वारा बड़े-बड़े इंडस्ट्रियल और पेडस्टल पंखों का इस्तेमाल करते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
बारिश से भीगे फुटपाथ पर मरम्मत का काम तेज़ करने के लिए अपनाया गया यह असामान्य तरीका व्यापक आलोचना का कारण बना और ऑनलाइन मीम्स की बाढ़ आ गई। लोगों ने सवाल उठाया — अगर एक्सप्रेसवे ठीक से बना होता, तो पंखों से सुखाने की नौबत ही क्यों आती?
अखिलेश यादव का तीखा हमला
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस पूरे मामले को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार पर सीधा हमला बोला। वायरल वीडियो शेयर करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि जो हाईवे कुछ ही हफ्ते पहले बड़े जोश के साथ खोला गया था, उसकी अभी से मरम्मत और पंखों से सुखाई क्यों हो रही है।
“यह है BJP के विकास की नई हवा।” — अखिलेश यादव, अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी
“यह है BJP के विकास की नई हवा।”
यादव ने आरोप लगाया कि यह घटना निर्माण कार्य की खराब गुणवत्ता को उजागर करती है और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करती है।
NHAI ने की सख्त कार्रवाई — 3 इंजीनियर हटाए
बढ़ते विवाद के बीच नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने कड़ा कदम उठाया। NHAI ने इस प्रोजेक्ट से जुड़े तीन इंजीनियरों को हटा दिया, निर्माण कंपनी PNC Infratech के खिलाफ कार्रवाई शुरू की, और मरम्मत का काम पूरा होने तक पूरे एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली को निलंबित कर दिया।
NHAI अधिकारियों के अनुसार उन्नाव में शुरुआती नुकसान सिर्फ 120 मीटर के हिस्से तक सीमित था, जिसमें से लगभग 100 मीटर बिटुमिनस सतह की मरम्मत की गई जबकि 20 मीटर हिस्से को पूरी तरह से दोबारा बनाया गया। लेकिन इसके बाद ताज़ा नुकसान की खबरें सामने आती रहीं।
👷 3 इंजीनियर परियोजना से हटाए गए
🏗️ PNC Infratech के खिलाफ कार्रवाई शुरू
🚫 पूरे एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली रोकी गई
🔧 मरम्मत पूरी होने तक टोल बंद रहेगा
📏 लंबाई: 63 किलोमीटर
🛣️ 6-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड
🏷️ नाम: National Expressway 6 (NE-6)
अन्य नाम: अवध एक्सप्रेसवे
💰 लागत: ₹4,200-4,700 करोड़
📅 उद्घाटन: 13 जुलाई 2026
आगरा में भी वही कहानी — विरोध का अनोखा तरीका
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे विवाद के बीच ही आगरा में भी एक सड़क धंसने की घटना सामने आई। आगरा के कमला नगर इलाके की कर्मयोगी कॉलोनी में भारी बारिश के कारण सड़क का एक बड़ा हिस्सा अचानक धंस गया, जिससे एक विशाल गड्ढा बन गया।
समाजवादी पार्टी नेता नितिन कोहली ने एक अनोखे तरीके से विरोध जताया — वे लकड़ी की सीढ़ी के सहारे उस गड्ढे में उतर गए, जबकि दो लोग सीढ़ी को पकड़े हुए थे। गड्ढे के अंदर खड़े होकर उन्होंने सरकार के विकास के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा — “क्या यही विकास है? जहां भी सड़कें बनी हैं, वहां हर जगह गड्ढे हैं।”
इस साल के मानसून ने उत्तर प्रदेश के सड़क निर्माण की गुणवत्ता की पोल खोल दी है। दिल्ली-देहरादून, दिल्ली-मुंबई या दिल्ली-गुरुग्राम जैसे कई हाल ही में बने या चौड़े किए गए हाईवे भारी बारिश में टूटते नज़र आए हैं।
घटनाक्रम — पूरी टाइमलाइन
🎉 13 जुलाई 2026 — नितिन गडकरी ने बड़े जोश से एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया
⚠️ 26 जुलाई की रात (13 दिन बाद) — उन्नाव में सड़क धंसने, सतह खिसकने और कटाव के पहले संकेत मिले
📹 25 जुलाई — कोरारी गांव के पास 5-7 मीटर सड़क धंसी; SP नेता मधुसूदन यादव का वीडियो वायरल
🔧 तुरंत बाद — NHAI ने 120 मीटर हिस्से की मरम्मत शुरू की
🌀 6 अगस्त 2026 — बेगमखेड़ा में पंखों से सड़क सुखाने का वीडियो वायरल; अखिलेश यादव का हमला
👷 इसके बाद — NHAI ने 3 इंजीनियर हटाए, PNC Infratech पर कार्रवाई, टोल वसूली रोकी
🚨 10 अगस्त 2026 — एक ही दिन में 10 अलग-अलग जगहों पर सड़क धंसने की ताज़ा घटनाएं
🕳️ इसी दौरान — आगरा में भी सड़क धंसी; SP नेता का गड्ढे में उतरकर विरोध
आखिर सड़क क्यों धंस रही है? — तकनीकी कारण
शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार भारी बारिश ने सड़क के आधार (base) को कमज़ोर कर दिया। जब सड़क निर्माण में सही जल निकासी व्यवस्था (drainage system) नहीं बनाई जाती, या फिर बेस लेयर की कॉम्पैक्शन ठीक से नहीं होती — तो बारिश का पानी सड़क के नीचे रिसकर मिट्टी को कमज़ोर कर देता है, जिससे ऊपर की सतह धंस जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या सिर्फ खराब बारिश की नहीं, बल्कि निर्माण के समय गुणवत्ता नियंत्रण में कमी की भी है। ₹67 करोड़ प्रति किलोमीटर की भारी लागत के बावजूद अगर सड़क महज़ 13-27 दिनों में धंसने लगे — तो यह निर्माण प्रक्रिया, सामग्री की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
यह अकेला मामला नहीं — देशभर के हाईवे पर सवाल
यह इस साल पहली बार नहीं है जब बारिश ने सड़कों की गुणवत्ता को उजागर किया है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे जैसे कई हाल ही में बने या चौड़े किए गए हाईवे भी भारी बारिश में टूटते नज़र आए हैं।
यह एक व्यापक पैटर्न की ओर इशारा करता है — जहां तेज़ी से इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के दबाव में गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा हो सकता है। मानसून हर साल आता है, फिर भी हर साल नई सड़कें उसकी मार नहीं झेल पातीं — यह सवाल जनता और विपक्ष दोनों उठा रहे हैं।
📌 मुख्य सवाल: ₹4,700 करोड़ की लागत से बना एक्सप्रेसवे अगर 27 दिन में ही 10 जगह धंस जाए — तो सवाल सिर्फ एक ठेकेदार या इंजीनियर का नहीं, बल्कि पूरी निर्माण और निगरानी व्यवस्था का है। जनता को अभी और जवाब चाहिए — मरम्मत कब पूरी होगी, टोल कब शुरू होगा, और भविष्य में ऐसी घटनाएं कैसे रुकेंगी।
स्रोत: Amar Ujala · Free Press Journal (Biswajeet Banerjee) · The Federal · NewsBytes App · The Swipe Up — जुलाई-अगस्त 2026। यह एक विकासशील खबर है।
यह मूल हिंदी लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें सभी पक्षों की बातें निष्पक्ष रूप से प्रस्तुत की गई हैं।
