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Anti-Paper Leak Bill 2026संसद से पास, अब राष्ट्रपति की मंजूरी बाकी1 min read

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🔴 ब्रेकिंग न्यूज़

Anti-Paper Leak Bill 2026
संसद से पास, अब राष्ट्रपति की मंजूरी बाकी

पेपर लीक करने वालों को 10 साल की जेल और ₹10 करोड़ तक का जुर्माना

📅 30 जुलाई 2026 🏛️ नई दिल्ली
10
साल तक की जेल
₹10Cr
सिंडिकेट पर जुर्माना
60
दिन में जांच पूरी
3
महीने में ट्रायल

नई दिल्ली: संसद में मानसून सत्र के दौरान Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 को लोकसभा और राज्यसभा दोनों में पास कर दिया गया है। अब यह बिल राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून बन जाएगा। यह बिल मौजूदा Public Examinations Act, 2024 में संशोधन करता है और पेपर लीक जैसी धांधलियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान करता है।

बिल को केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 27 जुलाई 2026 को लोकसभा में पेश किया था। 24 जुलाई 2026 को केंद्रीय कैबिनेट ने इसे मंजूरी दी थी। विपक्ष ने इस दौरान जमकर हंगामा किया और वॉकआउट भी किया, लेकिन सरकार ने बिल पास करा लिया।

बिल में क्या-क्या है नया?

⚠️

व्यक्तिगत दोषी

5 से 10 साल की जेल + ₹50 लाख तक जुर्माना

🚨

संगठित सिंडिकेट

न्यूनतम 7 साल जेल + ₹10 करोड़ तक जुर्माना

✅

जांच की समयसीमा

FIR दर्ज होने के 60 दिनों में जांच पूरी होगी

⚖️

फास्ट-ट्रैक कोर्ट

हर राज्य में स्पेशल कोर्ट, 3 महीने में ट्रायल पूरा

📋 2024 vs 2026: क्या बदला?

Provision2024 Act2026 Amendment
न्यूनतम सजा (व्यक्ति)3 साल5 साल ⬆️
अधिकतम सजा10 साल10 साल
व्यक्तिगत जुर्माना₹10 लाख₹50 लाख ⬆️
सिंडिकेट जुर्माना₹1 करोड़₹10 करोड़ ⬆️
सर्विस प्रोवाइडर डिबारमेंट4 साल8 साल ⬆️
जांच समयसीमाकोई निश्चित नहीं60 दिन ✅
फास्ट-ट्रैक कोर्टसीमितअनिवार्य ✅
स्पेशल टास्क फोर्सनहींहाँ ✅

🏛️ संसद में क्या हुआ?

29 जुलाई 2026 को लोकसभा में इस बिल पर जबरदस्त बहस हुई। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार ने “ईमानदार भावना” में यह संशोधन लाया है। उन्होंने बताया कि 2024 के कानून लागू होने के बाद से अब तक 52 FIR दर्ज हो चुकी हैं और पेपर लीक से जुड़े आत्महत्या के मामले घटे हैं।

इस दौरान राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि गृह मंत्री अमित शाह ने NEET-UG विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों को गोली चलाने का आदेश दिया। जितेंद्र सिंह ने इसे खारिज करते हुए कहा कि “किसी भी छात्र पर गोली नहीं चलाई गई” और पुलिस ने अत्यधिक संयम बरता।

किरेन रीजीजू ने राहुल गांधी पर संसद को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “गृह मंत्री या कोई अन्य मंत्री गोली चलाने का आदेश नहीं देता। यह मजिस्ट्रेट या SDM के अधिकार क्षेत्र में आता है।”

विपक्ष ने हंगामा किया और वॉकआउट किया, लेकिन सरकार ने बिल पास करा लिया। इसके बाद अमित शाह ने X (Twitter) पर पोस्ट कर कहा कि यह कानून छात्रों के सपनों की रक्षा करेगा।

⏳ Timeline: बिल का सफर

फरवरी 2024

Public Examinations Bill पेश हुआ

जून 2024

2024 Act लागू हुआ

मई 2026

NEET-UG पेपर लीक, परीक्षा रद्द

24 जुलाई 2026

कैबिनेट ने Amendment Bill को मंजूरी दी

27 जुलाई 2026

लोकसभा में बिल पेश

29 जुलाई 2026

लोकसभा से बिल पास ✅

30 जुलाई 2026

राज्यसभा से बिल पास ✅

अगला कदम

राष्ट्रपति की मंजूरी → कानून लागू ⏳

किन परीक्षाओं पर लागू होगा?

यह कानून उन सभी सार्वजनिक परीक्षाओं पर लागू होगा जो केंद्र सरकार या अधिसूचित संगठनों द्वारा आयोजित की जाती हैं:

  • NEET-UG, JEE Main, CUET, UGC-NET (NTA द्वारा)
  • UPSC Civil Services, CDS, NDA, CAPF
  • SSC CGL, CHSL, MTS, GD, JE
  • RRB NTPC, Group D, ALP
  • IBPS PO, Clerk, SO, RRB
  • केंद्र सरकार की अन्य अधिसूचित परीक्षाएं

⚖️ Special Fast Track Courts: कैसे काम करेंगी?

हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में एक Sessions Court को Special Fast Track Court के रूप में नामित किया जाएगा। ये कोर्ट:

  • रोजाना सुनवाई करेंगी (day-to-day trial)
  • चार्जशीट दाखिल होने के 3 महीने में ट्रायल पूरा करेंगी
  • भारतीय न्याय संहिता (BNSS) 2023 के तहत Special Public Prosecutors नियुक्त किए जाएंगे
  • High Court की 2-जजों की बेंच अपील सुनेगी, जिसे 3 महीने में निपटाना होगा
  • अपील 30 दिनों में दायर होनी चाहिए, अधिकतम 90 दिन की छूट

🎯 यह कानून किसे नहीं सजा देगा?

सबसे ज़रूरी बात — यह कानून ईमानदार छात्रों को निशाना नहीं बनाएगा। यह केवल उन लोगों पर कार्रवाई करेगा जो:

  • पेपर लीक सिंडिकेट चलाते हैं
  • सर्वर हैक करते हैं
  • OMR शीट में हेराफेरी करते हैं
  • किसी और की जगह परीक्षा देते हैं (impersonation)
  • फर्जी परीक्षा केंद्र चलाते हैं
  • मार्क्स/मेरिट लिस्ट में हेराफेरी करते हैं
  • संस्थागत सहयोग (institutional collusion) करते हैं

📢 सारांश: 10 पॉइंट में समझें

  1. Anti-Paper Leak Bill 2026 संसद के दोनों सदनों से पास हो चुका है
  2. यह Public Examinations Act, 2024 में संशोधन है
  3. पेपर लीक करने वालों को 5-10 साल की जेल होगी
  4. व्यक्तिगत जुर्माना ₹50 लाख तक बढ़ाया गया
  5. सिंडिकेट पर ₹10 करोड़ तक जुर्माना
  6. जांच 60 दिनों में पूरी करनी होगी
  7. हर राज्य में Special Fast Track Court बनेगी
  8. ट्रायल 3 महीने में पूरा होगा
  9. Special Task Force (STF) गठित की जा सकती है
  10. अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून बनेगा

💬 एक्सपर्ट की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि कानून बनना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके अकेले पेपर लीक पूरी तरह खत्म नहीं होगा। इसके लिए डिजिटल सुरक्षा बढ़ानी होगी, प्रश्नपत्र छपाई और परिवहन में सुधार करना होगा, और जांच एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है।

सुप्रीम कोर्ट (2002) ने कहा था कि आपराधिक कार्यवाही के लिए समयसीमा निर्धारित करना उचित नहीं है। हालांकि, सरकार का तर्क है कि पेपर लीक जैसे मामलों में तेजी से न्याय ज़रूरी है ताकि छात्रों का भविष्य प्रभावित न हो।

आगे क्या?

अब बिल राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार कर रहा है। मंजूरी मिलते ही इसे Official Gazette में प्रकाशित किया जाएगा और कानून लागू हो जाएगा। इसके बाद हर राज्य को Special Fast Track Courts नामित करनी होंगी और Special Public Prosecutors नियुक्त करने होंगे।

लाखों छात्र जो NEET, JEE, UPSC, SSC, Banking जैसी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें उम्मीद है कि यह कानून परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता बहाल करेगा और उनके सपनों की रक्षा करेगा।

📰 यह खबर Economic Times, NDTV, The Hindu, Times of India और PRS India के स्रोतों पर आधारित है

🕐 अपडेटेड: 30 जुलाई 2026 | ✍️ रिपोर्ट

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