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Monday, October 26, 2026
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बिहार: SIR प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची में जुड़े 14 लाख नए मतदाता, राजनीतिक सरगर्मी तेज1 min read

🛡️ प्रूफ़-चेक: यह खबर/दस्तावेज़ World Eye Bharat Team द्वारा 100% सत्यापित (Verified) है।

​राजनीतिक ब्यूरो | विशेष रिपोर्ट

अपडेटेड: अक्टूबर 2026

​मुख्य बातें (Key Highlights):

  • ​मतदाता सूची का पुनरीक्षण: बिहार में विशेष संस्थागत समीक्षा (SIR) की प्रक्रिया और उसके बाद मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण का काम तेजी से पूरा किया गया है।
  • ​14 लाख नए नाम जुड़े: ताजा आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस विशेष प्रक्रिया के बाद पिछले एक साल के दौरान बिहार की वोटर लिस्ट में लगभग 14 लाख नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए हैं।
  • ​राजनीतिक प्रतिक्रिया: इन आंकड़ों के सामने आने के बाद राज्य में राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है, जहाँ विपक्ष और सत्ता पक्ष अपनी-अपनी दलीलें रख रहे हैं।

​विस्तृत समाचार (Detailed News):

​पटना:

बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और उसके बाद की गई संशोधनों की प्रक्रिया के बाद राज्य की चुनावी राजनीति में हलचल बढ़ गई है। निर्वाचन आयोग द्वारा अपनाई गई इस प्रक्रिया के बाद हाल ही में सामने आए ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले एक साल के अंतराल में बिहार की वोटर लिस्ट में करीब 14 लाख नए मतदाता जुड़े हैं।

​फॉर्म-6 के जरिए जुड़े नाम

​रिपोर्ट्स के मुताबिक, विभिन्न बूथों और ऑनलाइन माध्यमों से ‘फॉर्म-6’ भरकर बड़ी संख्या में नागरिकों ने मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन किए थे। जांच और सत्यापन के बाद इनमें से लगभग 14 लाख वैध आवेदनों को स्वीकार कर लिया गया। नए जुड़ने वाले मतदाताओं में पहली बार मतदान करने वाले युवा तथा वे लोग भी शामिल हैं जिनके नाम पिछली समीक्षा के दौरान किन्हीं कारणों से सूची से छूट गए थे या हटाए गए थे।

​राजनीतिक दलों में छिड़ी सियासत

​इस अपडेट के बाद राज्य में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सहित अन्य विपक्षी दलों ने इस पर सवाल उठाते हुए इसे पहले की गई बड़ी कटौतियों और प्रशासनिक कमियों से जोड़कर देखना शुरू कर दिया है। वहीं, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इन आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ना और उसका नियमित अद्यतन (Update) करना चुनाव आयोग की एक निरंतर और सामान्य प्रक्रिया है, जिसमें पात्रता के आधार पर हर नागरिक को अपना नाम दर्ज कराने का अधिकार होता है।

​(सोर्स: चुनाव आयोग के आंकड़े, राजनीतिक बयान और मीडिया रिपोर्ट्स)

​(डिस्क्लेमर: यह खबर हालिया प्रशासनिक आंकड़ों और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के आधार पर तैयार की गई है।)

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