हैदराबाद के बाद अब बेंगलुरु के लॉ कॉलेज में CJI को बुलाने का विरोध, BCI अध्यक्ष के खिलाफ भी नाराजगी
हैदराबाद के बाद अब बेंगलुरु के लॉ कॉलेज में CJI को बुलाने का विरोध, BCI अध्यक्ष के खिलाफ भी नाराजगी
हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ में उठा विवाद अब बेंगलुरु तक पहुंच गया है। नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU), बेंगलुरु के छात्रों और पूर्व छात्रों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा को विश्वविद्यालय के आगामी दीक्षांत समारोह में बुलाए जाने का कड़ा विरोध जताया है।
700 से ज्यादा छात्रों-पूर्व छात्रों का साझा बयान
15 अगस्त को जारी एक संयुक्त बयान में NLSIU के 2026 बैच के 165 ग्रेजुएट होने वाले छात्रों, 409 मौजूदा विद्यार्थियों और 128 पूर्व छात्रों समेत कुल 700 से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर किए। बयान में BCI के उस विवादित आदेश की तीखी निंदा की गई, जिसमें हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी के छात्रों का वकील के रूप में नामांकन अस्थायी रूप से रोका गया था। NLSIU समुदाय ने कहा कि वे NALSAR के छात्रों के साथ पूरी तरह एकजुट हैं, जिन्होंने सत्ता के सामने अपनी बात रखने का साहस दिखाया।
NALSAR में शुरू हुआ पूरा विवाद
यह पूरा मामला हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी से शुरू हुआ, जहां करीब 450 छात्रों ने एक शांतिपूर्ण अभियान के जरिए CJI सूर्यकांत को अपने दीक्षांत समारोह का मुख्य अतिथि बनाए जाने का विरोध किया था। छात्रों की यह नाराजगी दिल्ली में NEET परीक्षा को लेकर हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़ी एक सुनवाई में CJI की एक टिप्पणी के बाद शुरू हुई थी, जिसे छात्रों ने आपत्तिजनक माना।
इसके जवाब में BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने 13 अगस्त को छह पन्नों का आदेश जारी कर सभी राज्य बार काउंसिलों को निर्देश दिया कि NALSAR के 2026 बैच के ग्रेजुएट्स का अधिवक्ता के रूप में एनरोलमेंट अगले आदेश तक रोक दिया जाए। BCI ने इसे छात्रों के कथित संगठित विरोध अभियान की जांच से जोड़ा।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद पीछे हटा BCI
यह मामला जल्द ही सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। 14 अगस्त 2026 को CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने BCI की इस कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई उचित नहीं है। कोर्ट ने BCI से जवाब मांगा और छात्रों पर आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी। कोर्ट के रुख के बाद BCI ने अपना आदेश वापस ले लिया और NALSAR के 2026 बैच के एनरोलमेंट पर लगी रोक हटा दी गई।
NLSIU छात्रों की मांगें
NLSIU के छात्रों ने अपनी मांगों को संविधान और कानून से भी जोड़ा है। उनका कहना है कि BCI की कार्रवाई एडवोकेट्स एक्ट, 1961 के तहत उसे मिली शक्तियों के दायरे से बाहर है। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि इस कार्रवाई से संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत मिली अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन होता है।
NLSIU समुदाय ने BCI से NALSAR के छात्रों से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की है। बयान में यह भी कहा गया कि भले ही BCI ने NALSAR के खिलाफ अपनी कार्रवाई वापस ले ली हो, लेकिन एक वैधानिक संस्था द्वारा किसी सरकारी विश्वविद्यालय के छात्रों को इस तरह डराने की कोशिश स्वीकार्य नहीं है।
CJI का रुख
विवाद बढ़ने पर CJI सूर्यकांत ने खुद भी अपनी प्रतिक्रिया दी और इसे अपने और छात्रों के बीच का निजी मामला बताया। उन्होंने साफ किया कि छात्रों के विरोध पर इस तरह की अनुशासनात्मक कार्रवाई ठीक नहीं है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया भी शुरू
इस पूरे विवाद पर राजनीतिक हलकों से भी प्रतिक्रियाएं आईं। AIMIM प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने BCI के कदम को असंवैधानिक और निंदनीय बताया।
निष्कर्ष
हैदराबाद से शुरू हुआ यह विवाद अब देश के प्रमुख लॉ स्कूलों में फैलता जा रहा है। NALSAR के बाद NLSIU बेंगलुरु के छात्रों का विरोध इस बात का संकेत है कि छात्र समुदाय CJI और BCI अध्यक्ष की दीक्षांत समारोहों में मौजूदगी को लेकर एकजुट होता दिख रहा है। आने वाले दिनों में अन्य लॉ यूनिवर्सिटीज में भी इसी तरह के विरोध की संभावना जताई जा रही है।
(यह रिपोर्ट विभिन्न समाचार स्रोतों पर आधारित है।)
