IAS ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के बेंगलुरु और बरेली स्थित घरों पर ED की छापेमारी
KPSC भर्ती घोटाला: ED ने IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के बेंगलुरु और बरेली स्थित घरों पर की छापेमारी
कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) की भर्ती परीक्षाओं में हुई कथित धांधली और उससे जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 2016 बैच के IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के ठिकानों पर छापेमारी की है। यह तलाशी बेंगलुरु स्थित उनके आवास और उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित पैतृक घर, दोनों जगह ली गई।
कौन हैं ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार?
ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार कर्नाटक कैडर के 2016 बैच के IAS अधिकारी हैं। वे फरवरी 2024 से मार्च 2026 तक कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) में परीक्षा नियंत्रक (कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन्स) के पद पर तैनात रहे। इसी साल मार्च में उन्हें इस पद से हटा दिया गया था और जून में उनका तबादला उद्योग एवं वाणिज्य विभाग में कर दिया गया, जहां वे वर्तमान में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) निदेशक के पद पर कार्यरत हैं।
PMLA के तहत हुई छापेमारी
PTI की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने बताया कि गंगवार के बेंगलुरु और बरेली स्थित ठिकानों पर यह तलाशी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत ली गई। हालांकि तलाशी के दौरान ED के अधिकारी इनमें से किसी जगह पर मौजूद थे या नहीं, इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
यह छापेमारी उस बड़ी कार्रवाई की अगली कड़ी मानी जा रही है, जिसके तहत 18 अगस्त को ED ने कर्नाटक और अहमदाबाद में कुल 21 ठिकानों पर तलाशी ली थी। इसमें KPSC का दफ्तर, आयोग के अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकर का आवास, आयोग के एक अन्य सदस्य का घर, कथित बिचौलियों के ठिकाने, एक टेस्टिंग एजेंसी का कार्यालय और कुछ चयनित उम्मीदवारों के घर भी शामिल थे।
वेटरनरी अधिकारी भर्ती घोटाले से जुड़ा है मामला
यह पूरा मामला KPSC द्वारा आयोजित वेटरनरी अधिकारियों की भर्ती परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। इसमें पेपर लीक होने, OMR उत्तर पत्रकों (आंसर शीट) से छेड़छाड़ करने और चयन प्रक्रिया में हेराफेरी करने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। चूंकि गंगवार इसी अवधि के दौरान KPSC में परीक्षा नियंत्रक के पद पर तैनात थे, इसलिए उनकी भूमिका को लेकर विशेष रूप से जांच एजेंसियों की नजर उन पर टिकी हुई है।
शनिवार को कुछ घंटों के लिए हुए थे ‘लापता’
छापेमारी से जुड़े इस पूरे घटनाक्रम में एक और नाटकीय मोड़ तब आया, जब शनिवार (22 अगस्त) को गंगवार कुछ घंटों के लिए अचानक संपर्क से बाहर हो गए। जानकारी के अनुसार, 20 अगस्त को वे बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से दिल्ली के लिए उड़ान पर रवाना हुए थे, जिसके बाद उनका आधिकारिक फोन बंद हो गया और वे अधिकारियों व सहकर्मियों के संपर्क से बाहर हो गए। चूंकि यह घटनाक्रम ED की छापेमारी के ठीक बाद सामने आया, इसलिए इसने कई तरह के कयासों को जन्म दे दिया।
गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने की पुष्टि, फिर सुलझा मामला
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने शनिवार को इस बात की पुष्टि की कि सरकार को अधिकारी के संपर्क से बाहर होने की जानकारी मिली थी। उन्होंने बताया कि गंगवार के परिवार की ओर से कोई औपचारिक गुमशुदगी की शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। कुछ घंटों बाद ही यह अनिश्चितता खत्म हो गई, जब गंगवार ने खुद सरकार से संपर्क किया। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि वे अपने पिता की सेहत से जुड़ी एक पारिवारिक इमरजेंसी की वजह से तुरंत अपने पैतृक स्थान (बरेली, उत्तर प्रदेश) के लिए रवाना हुए थे और इसके लिए उन्होंने पहले ही छुट्टी की अर्जी दी थी।
गृह मंत्री खड़गे ने स्पष्ट किया कि गंगवार पर KPSC मामले में किसी तरह की गड़बड़ी का आरोप नहीं है और उनकी अनुपस्थिति का जांच से कोई आधिकारिक संबंध होने का कोई संकेत नहीं मिला है।
KPSC अध्यक्ष पर भी लटकी तलवार
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में KPSC के अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकर भी गहरी जांच के घेरे में हैं। जुलाई में राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने उन्हें पद के दुरुपयोग के आरोप में निलंबित कर दिया था। आरोप था कि उन्होंने अपने पद का इस्तेमाल कर अपनी दो बेटियों का औद्योगिक विस्तार अधिकारी (Industrial Extension Officer) के पद पर अवैध चयन करवाया। इनमें एक आरोप यह भी था कि उनकी बेटी ने आय प्रमाणपत्र में परिवार की वार्षिक आय महज 40,000 रुपये घोषित की थी, जबकि साहूकर स्वयं एक वरिष्ठ संवैधानिक पद पर रहते हुए इससे कहीं अधिक वेतन प्राप्त करते हैं।
हालांकि 18 अगस्त को कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्यपाल के इस निलंबन आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल मंत्रिपरिषद की अनिवार्य सलाह के बिना KPSC अध्यक्ष को स्वतंत्र रूप से निलंबित नहीं कर सकते। कोर्ट ने निर्देश दिया कि साहूकर को सात दिनों के भीतर पद पर बहाल किया जाए।
इसके बाद 21 अगस्त को कर्नाटक कैबिनेट ने फैसला लिया कि हाईकोर्ट द्वारा बताई गई प्रक्रिया का पालन करते हुए राज्यपाल को साहूकर को दोबारा निलंबित करने और उनके खिलाफ नए सिरे से कार्यवाही शुरू करने की सिफारिश की जाए।
आगे की जांच पर टिकी नजरें
गंगवार का KPSC से पुराना जुड़ाव होने के चलते उनकी संक्षिप्त अनुपस्थिति ने स्वाभाविक रूप से ध्यान खींचा, लेकिन अब वे सरकार के संपर्क में हैं और उन्होंने अपनी यात्रा का पारिवारिक कारण स्पष्ट कर दिया है, जिससे उनके ठिकाने को लेकर बनी तात्कालिक अनिश्चितता खत्म हो गई है। हालांकि ED की छापेमारी और उससे जुड़ी जांच अब भी जारी है, और आने वाले दिनों में इस पूरे भर्ती घोटाले को लेकर और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
खबर की मुख्य बातें (Key Points)
- ED ने PMLA के तहत IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के बेंगलुरु और बरेली स्थित घरों पर छापेमारी की
- गंगवार 2016 बैच के कर्नाटक कैडर IAS अधिकारी, पहले KPSC में परीक्षा नियंत्रक रह चुके हैं, अब MSME निदेशक
- मामला KPSC वेटरनरी अधिकारी भर्ती परीक्षा में पेपर लीक, OMR छेड़छाड़ और चयन में गड़बड़ी के आरोपों से जुड़ा
- 18 अगस्त को ED ने कर्नाटक और अहमदाबाद में कुल 21 ठिकानों पर पहले ही छापेमारी की थी
- 22 अगस्त को गंगवार कुछ घंटों के लिए संपर्क से बाहर हुए, जिससे विवाद और अटकलें शुरू हुईं
- गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने बताया – पारिवारिक इमरजेंसी (पिता की सेहत) के चलते बरेली गए थे, पहले से छुट्टी ली थी
- गंगवार पर KPSC मामले में किसी गड़बड़ी का आरोप नहीं, जांच से जुड़ाव का कोई आधिकारिक संकेत नहीं
- KPSC अध्यक्ष शिवशंकरप्पा साहूकर भी अपनी बेटियों की कथित अवैध नियुक्ति के आरोप में जांच के घेरे में
- हाईकोर्ट ने राज्यपाल का साहूकर को निलंबित करने वाला आदेश रद्द किया, बहाली का निर्देश दिया
- कर्नाटक कैबिनेट ने तय प्रक्रिया अपनाकर साहूकर को दोबारा निलंबित करने की सिफारिश की
4 लाइन में पूरी खबर
ED ने KPSC भर्ती घोटाले की जांच के तहत IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के बेंगलुरु और बरेली स्थित घरों पर PMLA के तहत छापेमारी की, जो पहले KPSC में परीक्षा नियंत्रक रह चुके हैं। यह मामला वेटरनरी भर्ती परीक्षा में पेपर लीक और OMR छेड़छाड़ के आरोपों से जुड़ा है, जिसमें ED पहले ही 21 ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है। छापेमारी के बाद गंगवार कुछ घंटों के लिए संपर्क से बाहर हो गए थे, जिससे विवाद खड़ा हुआ, लेकिन बाद में पता चला कि वे पिता की सेहत से जुड़ी पारिवारिक इमरजेंसी के चलते बरेली गए थे। इस बीच KPSC अध्यक्ष साहूकर भी अपनी बेटियों की कथित अवैध नियुक्ति को लेकर अलग से जांच का सामना कर रहे हैं।
(यह रिपोर्ट PTI और विभिन्न समाचार स्रोतों पर आधारित है।)
