चीनी के दाम में बड़ा उछाल
चीनी के दाम में बड़ा उछाल: एक महीने में 19 रुपये किलो महंगी हुई चीनी, 65 रुपये तक पहुंचा भाव
त्योहारी सीजन शुरू होने से ठीक पहले आम आदमी की रसोई का बजट गड़बड़ाने लगा है। खुदरा बाजार में चीनी के दाम पहली बार 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर बताया जा रहा है। सिर्फ एक महीने के भीतर चीनी की कीमतों में करीब 19 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
एक महीने पहले कितनी थी कीमत?
व्यापारियों के अनुसार, एक महीने पहले तक बाजार में चीनी 45 से 46 रुपये प्रति किलो के आसपास बिक रही थी। लेकिन बीते 15 दिनों में ही इसके दाम में करीब 15 रुपये प्रति किलो तक की तेज बढ़ोतरी देखी गई, जिसके बाद चीनी 65 रुपये किलो तक जा पहुंची। इस अचानक हुई बढ़ोतरी ने घरेलू बजट के साथ-साथ छोटे दुकानदारों और मिठाई कारोबारियों की चिंता भी बढ़ा दी है।
दाम बढ़ने के पीछे क्या वजह बताई जा रही है?
थोक व्यापारियों का कहना है कि सीजन के अंतिम दौर में चीनी मिलों के पास स्टॉक काफी सीमित रह गया है, जबकि त्योहारी मांग बढ़ने लगी है। बाजार में मांग की तुलना में आपूर्ति करीब आधी ही रह गई है, जिससे कीमतों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। व्यापारियों के अनुसार चीनी मिलें आमतौर पर अक्तूबर में नए सीजन के साथ फिर से चालू होती हैं, ऐसे में तब तक कीमतों में राहत मिलना मुश्किल लग रहा है।
सरकार का पक्ष: पर्याप्त स्टॉक, लेकिन जमाखोरी बनी वजह
दिलचस्प बात यह है कि केंद्र सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय का कहना है कि देश में घरेलू खपत की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त चीनी मौजूद है। मंत्रालय के अनुसार बाजार में जमाखोरी और सट्टेबाजी जैसी गतिविधियों ने कृत्रिम कमी की धारणा पैदा की है, जिसकी वजह से एक्स-मिल और खुदरा दोनों स्तर पर कीमतों में अनावश्यक अस्थिरता आई है। इसे देखते हुए सरकार ने त्योहारी सीजन से पहले चीनी के स्टॉक पर निगरानी बढ़ा दी है और डीलरों के लिए स्टॉक सीमा से जुड़े निर्देश भी जारी किए गए हैं।
मिठाई और अन्य उत्पादों पर भी पड़ रहा असर
चीनी महंगी होने का सीधा असर अब मिठाइयों और चीनी से बनने वाले अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतों पर भी दिखने लगा है। त्योहारी सीजन से पहले मिठाई कारोबारियों के लिए यह स्थिति खासी मुश्किल भरी साबित हो रही है, क्योंकि बढ़ी हुई लागत का बोझ आखिरकार ग्राहकों पर ही डालना पड़ रहा है।
आम उपभोक्ताओं पर असर
उपभोक्ताओं का कहना है कि चीनी के साथ-साथ दाल, सरसों तेल, रिफाइंड और रसोई गैस जैसी अन्य जरूरी वस्तुओं के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे घर का मासिक बजट संभालना मुश्किल होता जा रहा है। आने वाले दिनों में त्योहारी मांग और बढ़ने की संभावना के बीच यह देखना अहम होगा कि सरकार की निगरानी का कीमतों पर कितना असर पड़ता है।
(यह रिपोर्ट विभिन्न समाचार स्रोतों पर आधारित है।)
