सिद्धार्थनगर: बढ़नी के धनौरा बुजुर्ग में ‘VB-G RAM G’ योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा, 15 मजदूरों की जगह 70 की लग रही ऑनलाइन हाजिरी; प्रधान ने फोन काटा1 min read
ग्राउंड जीरो रिपोर्ट | ‘वर्ड आई भारत न्यूज़’
अपडेटेड: अक्टूबर 2026
मुख्य बातें (Key Highlights):
- VB-G RAM G योजना में धांधली की पोल: सिद्धार्थनगर जिले के बढ़नी ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत धनौरा बुजुर्ग में ‘विकसित भारत-रोज़गार एवं आजीविका के लिए गारंटी मिशन’ (VB-G RAM G) के तहत चल रहे कार्यों में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है।
- जमीनी हकीकत और मजदूरों के बयान: मौके पर पड़ताल के दौरान काम कर रहे 5 मजदूरों ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि धरातल पर सिर्फ 15 लोग काम कर रहे हैं, जबकि ऑनलाइन पोर्टल और मस्टर रोल में कागजों पर 70 लोगों की फर्जी हाजिरी दर्ज की जा रही है।
- प्रधान की चुप्पी और रवैया: इस गंभीर घोटाले और अनियमितता को लेकर जब ग्राम प्रधान से फोन पर पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उन्होंने संतोषजनक जवाब देने के बजाय फोन काट दिया और आमने-सामने (फेस टू फेस) बात करने की बात कहकर मीडिया के सवालों से बचते नजर आए।
विस्तृत समाचार (Detailed News):
बढ़नी (सिद्धार्थनगर):
उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के बढ़नी ब्लॉक के धनौरा बुजुर्ग ग्राम पंचायत में ग्रामीण विकास और रोजगार के नाम पर किस तरह सरकारी धन की लूट मची है, इसकी एक सनसनीखेज तस्वीर सामने आई है। ‘वर्ड आई भारत न्यूज़’ की टीम जब ‘VB-G RAM G’ योजना के तहत चल रहे कार्यों की जमीनी हकीकत टटोलने पहुँची, तो वहां का सच प्रशासनिक दावों की धज्जियां उड़ाने के लिए काफी था।
मजदूरों का बड़ा खुलासा: 15 काम कर रहे, 70 की लग रही हाजिरी

मौके पर मौजूद श्रमिकों और जमीनी पड़ताल से यह बात सामने आई कि कार्यस्थल पर वास्तविक रूप से केवल 15 मजदूर ही काम करते हुए पाए गए। लेकिन जब डिजिटल पोर्टल और उपस्थिति व्यवस्था (NMMS ऐप) की पड़ताल की गई, तो चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया—कागजों और ऑनलाइन पोर्टल पर इन मजदूरों की संख्या 70 दिखाई जा रही है। यानी धरातल पर महज चंद लोगों से काम कराकर बड़े पैमाने पर फर्जी मस्टर रोल चलाए जा रहे हैं और सरकारी बजट का खुलेआम बंदरबांट किया जा रहा है।

जिम्मेदार कैमरे और फोन पर खामोश, प्रधान ने काटा फोन
इस पूरे भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के संबंध में जब ग्राम प्रधान का पक्ष जानने के लिए उन्हें फोन पर संपर्क किया गया, तो उन्होंने मामले पर कोई स्पष्टीकरण देने से साफ इंकार कर दिया। फोन पर तीखे सवाल पूछे जाने पर प्रधान ने बीच में ही फोन काट दिया और केवल ‘फेस टू फेस’ मिलने की बात कहकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते दिखे। जनता के नुमाइंदों का इस तरह मीडिया के सवालों से भागना और फोन काटना सीधे तौर पर उनकी संलिप्तता को उजागर करता है।
प्रशासनिक जांच की मांग
ग्रामीण विकास योजनाओं में हो रहे इस खेल से क्षेत्र के लोगों में भारी आक्रोश है। अब यह बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि आखिर किसकी शह पर धनौरा बुजुर्ग में यह फर्जीवाड़ा फल-फूल रहा है। जनहित में उच्चाधिकारियों से मांग की जाती है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और फर्जी हाजिरी चलाकर सरकारी धन डकारने वालों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
(सोर्स: ‘वर्ड आई भारत न्यूज़’ ग्राउंड सर्वे और मौके पर मौजूद मजदूरों के बयान)
(डिस्क्लेमर: यह खबर जमीनी पड़ताल, मजदूरों के बयान (Statement) और प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर तैयार की गई है। संबंधित पक्ष (ग्राम प्रधान) का पक्ष जानने का प्रयास किया गया था, लेकिन उनके द्वारा फोन काट दिया गया। उनका पक्ष मिलने पर उसे आगे की कवरेज में शामिल किया जाएगा।)
(रिपोर्ट: ‘वर्ड आई भारत न्यूज़’)

