उर्वरक की कालाबाजारी पर यूपी सरकार की सख्ती — 136 लाइसेंस निलंबित, बड़े पैमाने पर छापेमारी जारी
🔴 बड़ी खबर · लखनऊ, उत्तर प्रदेश · जुलाई 2026
उर्वरक की कालाबाजारी पर यूपी सरकार की सख्ती — 136 लाइसेंस निलंबित, बड़े पैमाने पर छापेमारी जारी
कृषि विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार · खरीफ सीजन 2026 · जुलाई 2026
खरीफ सीजन के दौरान किसानों को उचित दर पर खाद उपलब्ध कराने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने उर्वरक की कालाबाजारी, जमाखोरी और ओवरचार्जिंग के खिलाफ सख्त अभियान छेड़ रखा है। इसी क्रम में राज्यभर में गड़बड़ी करने वाले 136 उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं।
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136 लाइसेंस
कालाबाजारी व अनियमितता में
निलंबित किए गए |
हजारों छापे
राज्यभर में विक्रेताओं के
यहां चली जांच |
FIR दर्ज
गंभीर गड़बड़ी वाले मामलों में
आपराधिक कार्रवाई |
क्या है पूरा मामला?
खरीफ सीजन में यूरिया, डीएपी और एनपीके जैसे उर्वरकों की मांग बढ़ने के साथ ही राज्य के कई जिलों से कालाबाजारी, ओवरचार्जिंग और जमाखोरी की शिकायतें सामने आई थीं। इसे गंभीरता से लेते हुए कृषि विभाग ने राज्यभर में उर्वरक विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों पर बड़े पैमाने पर छापेमारी अभियान चलाया। जांच में गड़बड़ी पाए जाने पर 136 विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं, जबकि कई अन्य को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
कृषि विभाग के अनुसार यह कार्रवाई आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) और उर्वरक नियंत्रण आदेश (Fertilizer Control Order) के तहत की गई है। जिन विक्रेताओं के यहां स्टॉक रजिस्टर में गड़बड़ी, बिना अनुमति के अतिरिक्त भंडारण, या तय दर से अधिक कीमत पर बिक्री जैसी अनियमितताएं पाई गईं, उनके खिलाफ यह कार्रवाई की गई है।
“किसानों को उचित दर पर खाद उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। कालाबाजारी और जमाखोरी करने वालों के खिलाफ कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
— उत्तर प्रदेश कृषि विभाग, अधिकारिक बयान
कार्रवाई की मुख्य बातें
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🚨 पाई गई गड़बड़ियां
❌ तय दर से अधिक कीमत पर उर्वरक बेचना ❌ बिना अनुमति अतिरिक्त स्टॉक जमा करना ❌ POS मशीन में स्टॉक का सही ब्योरा न देना ❌ किसानों को उर्वरक के साथ अन्य उत्पाद खरीदने के लिए बाध्य करना |
✅ प्रशासन की कार्रवाई
✅ 136 विक्रेताओं के लाइसेंस तत्काल निलंबित ✅ कई अन्य को कारण बताओ नोटिस जारी ✅ गंभीर मामलों में FIR दर्ज ✅ जिलावार निगरानी टीमें गठित |
राज्यव्यापी अभियान की बड़ी तस्वीर
यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश में चल रहे व्यापक उर्वरक निगरानी अभियान का हिस्सा है। हाल के महीनों में राज्य के विभिन्न जिलों — लखीमपुर खीरी, भदोही, फतेहपुर, श्रावस्ती, बलरामपुर, कुशीनगर और सोनभद्र सहित — में स्थानीय स्तर पर भी दर्जनों उर्वरक दुकानों के लाइसेंस निलंबित किए जा चुके हैं। कृषि विभाग की सब-डिविजनल टीमें नियमित रूप से स्टॉक रजिस्टर, मूल्य सूची और POS मशीन के आंकड़ों का मिलान कर रही हैं।
केंद्रीय उर्वरक मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार बीते कृषि सीजन में उत्तर प्रदेश ने कालाबाजारी विरोधी अभियान में देश में अग्रणी भूमिका निभाई थी, जहां हजारों निरीक्षणों के बाद सैकड़ों लाइसेंस रद्द या निलंबित किए गए थे और दर्जनों FIR दर्ज की गई थीं। इस वर्ष भी राज्य सरकार ने इसी सख्ती को जारी रखते हुए किसानों के हितों की रक्षा करने का भरोसा दिलाया है।
घटनाक्रम
📅 समयरेखा
🌱 खरीफ सीजन शुरू — यूरिया व डीएपी की मांग बढ़ने के साथ शिकायतें सामने आईं
🔍 पूरे सीजन में — जिलों में लगातार छापेमारी और निरीक्षण अभियान चला
📋 अलग-अलग जिलों में — स्थानीय स्तर पर दर्जनों लाइसेंस निलंबित किए गए
📢 जुलाई 2026 — राज्यभर में कुल 136 लाइसेंस निलंबन की पुष्टि हुई
किसानों के लिए क्या मायने रखता है यह कदम?
सब्सिडी वाले उर्वरकों की कीमत बाजार दर से काफी कम रखी जाती है, जिससे किसानों को राहत मिलती है, लेकिन इसी वजह से कुछ विक्रेता जमाखोरी या ओवरचार्जिंग के जरिए नाजायज फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। प्रशासन का कहना है कि इस सख्त कार्रवाई से बाजार में अनुशासन बना रहेगा, समय पर आपूर्ति सुनिश्चित होगी और किसानों को तय दर पर ही खाद मिल सकेगी।
📌 मुख्य बात: खरीफ सीजन के दौरान उर्वरक की कालाबाजारी और ओवरचार्जिंग पर लगाम कसने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्यभर में सख्त छापेमारी अभियान चलाया, जिसमें 136 विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित किए गए और कई मामलों में FIR दर्ज की गई। सरकार का दावा है कि इस कार्रवाई से बाजार अनुशासन मजबूत होगा और किसानों को समय पर उचित दर पर खाद मिलती रहेगी।
स्रोत: दैनिक जागरण · अमर उजाला (जिलावार रिपोर्ट्स) · कृषि एवं उर्वरक मंत्रालय, भारत सरकार · जुलाई 2026।
यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया मूल हिंदी आलेख है।
