इंदौर के भागीरथपुरा में 36 मौतों का जिम्मेदार कौन?
इंदौर के भागीरथपुरा में 36 मौतों का जिम्मेदार कौन? जांच आयोग ने हाईकोर्ट को सौंपी 600 पन्नों की रिपोर्ट
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल के कारण हुई करीब 36 मौतों के मामले में लंबे समय से चल रही जांच अब पूरी हो गई है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच द्वारा गठित एक सदस्यीय जांच आयोग ने अपनी 600 पन्नों से ज्यादा की विस्तृत रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश कर दी है।
दिसंबर-जनवरी में हुई थीं दर्दनाक मौतें
यह पूरा मामला बीते दिसंबर-जनवरी के दौरान सामने आया था, जब इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी की आपूर्ति के कारण बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़ गए थे। इस घटना में करीब 36 लोगों की जान चली गई थी, जबकि साढ़े चार सौ से ज्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। स्वास्थ्य विभाग की ओर से पेश जवाब में शुरुआत में 18 मौतों को दूषित पेयजल से जोड़ा गया था, हालांकि परिजनों का कहना था कि कई मामलों में डायरिया के कारण मरीजों की हालत तेजी से बिगड़ी थी।
रिटायर्ड जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में बना आयोग
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट की डबल बेंच ने 27 जनवरी 2026 को हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच आयोग गठित किया था। आयोग को शुरुआत में चार सप्ताह के भीतर अंतरिम रिपोर्ट सौंपने को कहा गया था, लेकिन मामले की जटिलता को देखते हुए इसमें कई बार समय बढ़ाया गया।
निगम, आईडीए और स्वास्थ्य विभाग से मांगे गए दस्तावेज
जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए इंदौर नगर निगम, इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए), जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े दस्तावेज मंगवाए। इसके साथ ही आयोग ने आम जनता से भी खुले तौर पर लिखित बयान आमंत्रित किए, ताकि घटना से जुड़ी हर पहलू की गहराई से जांच की जा सके।
सीलबंद लिफाफे में सौंपी गई रिपोर्ट
सूत्रों के अनुसार, आयोग की रिपोर्ट 600 पन्नों से ज्यादा की है और इसे पूरी तरह सीलबंद लिफाफे में हाईकोर्ट इंदौर बेंच में जमा कराया गया है। इस मामले में अगली सुनवाई की संभावित तारीख 25 अगस्त बताई जा रही है। हाईकोर्ट बेंच ही यह तय करेगी कि रिपोर्ट को कब और किस तरह खोला जाएगा, और इसकी प्रति कब उपलब्ध कराई जाएगी।
अधिकारियों और जनप्रतिनिधि की भूमिका की हुई जांच
जांच की पूरी प्रक्रिया को गोपनीय रखा गया है, क्योंकि मामला बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार आयोग ने कई आईएएस अधिकारियों, नगर निगम के विभिन्न अधिकारियों, स्थानीय पार्षद और निचले स्तर के कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की है। इस रिपोर्ट का सीधा असर तत्कालीन निगमायुक्त और उस समय के अपर आयुक्त सहित कई अधिकारियों की आगे की स्थिति पर पड़ सकता है।
मुआवजे को लेकर अब भी असमंजस
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने अब तक इन मौतों को आधिकारिक तौर पर दूषित पानी से जोड़कर मुआवजा राशि तय नहीं की है। फिलहाल रेडक्रॉस की ओर से पीड़ित परिवारों को इलाज के लिए दो-दो लाख रुपये की आर्थिक मदद दी गई थी। अब जांच आयोग की रिपोर्ट खुलने के बाद ही मुआवजे और जिम्मेदारी तय करने को लेकर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
जांच आयोग ने किन बिंदुओं पर की पड़ताल?
आयोग ने मुख्य रूप से इस बात की जांच की कि भागीरथपुरा में सप्लाई किया गया पानी वास्तव में दूषित था या नहीं, दूषित होने का स्रोत और कारण क्या रहा, इससे कितनी वास्तविक मौतें हुईं और कौन-सी बीमारियां फैलीं। इसके अलावा आयोग ने इस घटना के लिए प्रथम दृष्टया जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान करने के साथ-साथ प्रभावित परिवारों को दिए जाने वाले मुआवजे पर भी सिफारिशें तैयार की हैं।
(यह रिपोर्ट स्थानीय समाचार स्रोतों पर आधारित है।)
