मध्य प्रदेश में गहराता कैंसर संकट: हर दिन 133 मौतें, 80 हजार से ज्यादा मिले नए मरीज
मध्य प्रदेश में गहराता कैंसर संकट: हर दिन 133 मौतें, 80 हजार से ज्यादा मिले नए मरीज
मध्य प्रदेश में कैंसर की बीमारी लगातार गंभीर रूप लेती जा रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में प्रदेश में कैंसर के 88,297 नए मामले सामने आए, जबकि इसी साल कैंसर से 48,694 लोगों की मौत हो गई। इस हिसाब से देखा जाए तो प्रदेश में हर दिन औसतन करीब 133 लोगों की जान कैंसर की वजह से जा रही है।
चार साल में तेजी से बढ़े मामले
स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 2021 में मध्य प्रदेश में कैंसर के अनुमानित मामलों की संख्या 79,871 थी, जो 2025 में बढ़कर 88,297 तक पहुंच गई। यानी महज चार वर्षों में ही राज्य में कैंसर के मामलों में हजारों की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो स्वास्थ्य विभाग के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।
देश में मध्य प्रदेश की स्थिति
नए कैंसर मामलों के लिहाज से मध्य प्रदेश देश के टॉप 10 राज्यों में शुमार है। वहीं कैंसर से होने वाली मौतों के मामले में राज्य देशभर में सातवें स्थान पर है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि प्रदेश में कैंसर न केवल तेजी से फैल रहा है, बल्कि समय पर इलाज न मिल पाने या देर से बीमारी का पता चलने के कारण मौत का आंकड़ा भी ऊंचा बना हुआ है।
देशभर में भी बढ़ रहे कैंसर के मामले
यह सिर्फ मध्य प्रदेश तक सीमित समस्या नहीं है। संसद में साझा किए गए स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2021 के बाद से देशभर में हर साल औसतन 28 हजार नए कैंसर मामले और करीब 15 हजार अतिरिक्त मौतें दर्ज की जा रही हैं। अनुमान के मुताबिक, 2021 में देश में करीब 14.26 लाख कैंसर के मामले थे, जो 2025 तक बढ़कर लगभग 15.7 लाख हो चुके हैं। इस दौरान उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा नए मामले दर्ज किए गए हैं।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ता दबाव
कैंसर के मामलों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ा दिया है। समय पर जांच, बेहतर उपचार केंद्रों की उपलब्धता और जागरूकता की कमी जैसे मुद्दे लगातार सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि तंबाकू सेवन, धूम्रपान, बदलती जीवनशैली और असंतुलित खान-पान इस बढ़ोतरी के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
समय पर जांच और जागरूकता जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर के मामलों को नियंत्रित करने के लिए शुरुआती जांच और नियमित स्क्रीनिंग बेहद जरूरी है। कई मामलों में बीमारी का पता देर से चलने के कारण इलाज मुश्किल हो जाता है और मृत्यु दर बढ़ जाती है। ऐसे में सरकार और स्वास्थ्य विभाग दोनों के लिए जरूरी हो गया है कि वे प्रदेश में कैंसर जांच केंद्रों की संख्या बढ़ाएं और आम जनता के बीच नियमित जागरूकता अभियान चलाएं, ताकि समय रहते बीमारी की पहचान हो सके और जानें बचाई जा सकें।
(यह रिपोर्ट सरकारी आंकड़ों और समाचार स्रोतों पर आधारित है। यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए योग्य डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।)
