सिद्धार्थनगर में 3 पुलिसकर्मी लाइन हाजिर
सिद्धार्थनगर में 3 पुलिसकर्मी लाइन हाजिर: सील जनता सेवा हॉस्पिटल मामले में जांच तेज, भाई ने पुलिसकर्मियों पर लगाया वसूली का आरोप
सिद्धार्थनगर जिले में सील किए गए जनता सेवा हॉस्पिटल से जुड़े विवाद ने अब नया और गंभीर मोड़ ले लिया है। अस्पताल प्रकरण की जांच के बीच तीन पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है, वहीं एक पक्ष की ओर से इन पुलिसकर्मियों पर कथित रूप से वसूली किए जाने का गंभीर आरोप भी लगाया गया है।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
यह मामला मूल रूप से इटवा कस्बे के एक निजी अस्पताल से जुड़ा है, जिसके संचालक राकेश यादव हैं। दरअसल एक शिशु मृत्यु प्रकरण में जनता सेवा हॉस्पिटल को सील कर दिया गया था। इसी दौरान अस्पताल संचालक के भाई की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई कि तीन पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की, उन्हें हॉस्पिटल से जबरन घसीटकर बाहर ले गए और उनके वाहन में रखे रुपये भी वापस नहीं किए।
दो लाख में से सिर्फ 85 हजार वापस करने का आरोप
शिकायती पत्र में सबसे गंभीर आरोप यह लगाया गया है कि जिस वाहन को पुलिसकर्मी ले गए, उसमें करीब दो लाख रुपये नकद रखे हुए थे। आरोप है कि अगले दिन इस पूरी रकम में से महज 85 हजार रुपये ही वापस किए गए, जबकि बाकी रकम का कोई हिसाब नहीं दिया गया। इस शिकायत के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित तीनों पुलिसकर्मियों को तत्काल लाइन हाजिर करने का आदेश दिया गया।
देर रात ताला तोड़कर फिर से खोला गया सील अस्पताल
इस पूरे विवाद में एक और चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब सोमवार देर रात इस सील किए गए जनता सेवा हॉस्पिटल का ताला तोड़कर वहां दोबारा मरीजों का इलाज शुरू कर दिया गया। सूचना मिलने पर जब प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची, तो पाया कि अस्पताल परिसर खुला हुआ है और वहां इलाज चल रहा है। इसके बाद अस्पताल के प्रबंधक समेत दो लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है।
जांच का दायरा बढ़ा
अस्पताल प्रकरण की जांच अब सिर्फ शिशु मृत्यु के मूल मामले तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसमें पुलिसकर्मियों की भूमिका, कथित वसूली और सील तोड़कर अस्पताल दोबारा खोले जाने जैसे कई पहलू जुड़ गए हैं। प्रशासन अब इस पूरे प्रकरण की व्यापक जांच में जुटा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किस स्तर पर लापरवाही या गड़बड़ी हुई।
जिले में निजी अस्पतालों की जांच पर पहले से सवाल
गौरतलब है कि सिद्धार्थनगर जिले में निजी और अनियमित चिकित्सा केंद्रों को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। प्रशासन ने इसे देखते हुए अवैध और अनियमित मेडिकल सेंटरों की शिकायतों की जांच के लिए एक विशेष टास्क फोर्स भी गठित की थी। ऐसे में जनता सेवा हॉस्पिटल से जुड़ा यह ताजा प्रकरण जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था और पुलिसिंग, दोनों पर एक साथ सवाल खड़े करता है।
आगे क्या हो सकती है कार्रवाई?
फिलहाल पुलिस विभाग और जिला प्रशासन दोनों स्तर पर मामले की जांच जारी है। लाइन हाजिर किए गए तीनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच की प्रक्रिया शुरू हो सकती है, वहीं सील तोड़कर अस्पताल संचालित करने के मामले में भी आगे कानूनी कार्रवाई की संभावना है। स्थानीय लोगों की मांग है कि दोनों पहलुओं की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
खबर की मुख्य बातें (Key Points)
- शिशु मृत्यु प्रकरण में सील किए गए जनता सेवा हॉस्पिटल (इटवा) से जुड़ा विवाद गहराया
- अस्पताल संचालक राकेश यादव के भाई ने 3 पुलिसकर्मियों पर मारपीट और वसूली का आरोप लगाया
- आरोप: वाहन में रखे 2 लाख रुपये में से सिर्फ 85 हजार रुपये वापस किए गए
- शिकायत के बाद तीनों आरोपी पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया
- सोमवार देर रात सील अस्पताल का ताला तोड़कर दोबारा इलाज शुरू करने का मामला सामने आया
- अस्पताल प्रबंधक समेत दो लोगों के खिलाफ FIR दर्ज
- जिले में पहले से अवैध/अनियमित मेडिकल सेंटरों की जांच के लिए टास्क फोर्स गठित है
- पूरे प्रकरण में अब पुलिस और प्रशासन दोनों स्तर पर जांच का दायरा बढ़ा
4 लाइन में पूरी खबर
सिद्धार्थनगर के इटवा कस्बे में शिशु मृत्यु प्रकरण में सील किए गए जनता सेवा हॉस्पिटल के मामले में तीन पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है, जिन पर अस्पताल संचालक के भाई से मारपीट और दो लाख रुपये में से सिर्फ 85 हजार वापस करने का वसूली का आरोप लगा है। इसी बीच सोमवार देर रात सील अस्पताल का ताला तोड़कर वहां दोबारा इलाज शुरू करने का मामला भी सामने आया, जिसके बाद प्रबंधक समेत दो लोगों पर FIR दर्ज की गई। अब यह पूरा प्रकरण पुलिसकर्मियों की भूमिका और अस्पताल प्रबंधन, दोनों को लेकर जांच के दायरे में है। जिले में पहले से अनियमित मेडिकल सेंटरों को लेकर विशेष टास्क फोर्स भी गठित है।
(यह रिपोर्ट स्थानीय समाचार स्रोतों पर आधारित है। आरोपों की पुष्टि विभागीय जांच के बाद ही हो सकेगी।)
