नौतनवां में खाद तस्करी का आरोप: बाइक से नेपाल पहुंच रही भारतीय खाद?
नौतनवां क्षेत्र में खाद तस्करी का आरोप, सुबह होते ही बाइक से नेपाल पहुंच रही भारतीय खाद?
महराजगंज जिले के नौतनवां थाना क्षेत्र में भारतीय यूरिया खाद की नेपाल तस्करी को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। भारत-नेपाल सीमा से सटे इस इलाके में तड़के सुबह होते ही मोटरसाइकिलों पर लदी खाद सीमा पार पहुंचाई जाने की आशंका जताई जा रही है, जिससे प्रशासन की चौकसी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्यों संवेदनशील है यह इलाका?
महराजगंज जिला भारत-नेपाल की खुली सीमा से लगा हुआ है, जहां आवाजाही पर कड़ी निगरानी रखना प्रशासन के लिए हमेशा एक चुनौती रहा है। भारत में सब्सिडी पर मिलने वाली यूरिया खाद नेपाल में महंगे दामों पर बिकती है, यही वजह है कि सीमावर्ती इलाकों से खाद तस्करी का सिलसिला लगातार सामने आता रहा है। सुबह के समय, जब चेकिंग व्यवस्था अपेक्षाकृत ढीली होती है, तस्कर मोटरसाइकिलों के जरिए खाद की खेप सीमा पार पहुंचाने की कोशिश करते हैं।
पहले भी पकड़ी जा चुकी हैं कई खेप
यह पहला मौका नहीं है जब नौतनवां और आसपास के इलाकों में खाद तस्करी की घटनाएं सामने आई हों। बीते कुछ महीनों में पुलिस ने इस क्षेत्र में कई बार बड़ी कार्रवाई करते हुए तस्करों को पकड़ा है। कभी साइकिल पर लदी खाद के साथ आरोपी पकड़े गए, तो कभी मोटरसाइकिल पर ले जाई जा रही खाद बरामद हुई। पुलिस अधीक्षक महराजगंज के निर्देश पर सीमा से सटे इलाकों में लगातार तस्करी विरोधी अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत कई बार बॉर्डर से यूरिया की बोरियां, मोटरसाइकिलें और साइकिलें बरामद कर आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। बरामद खाद को कस्टम विभाग को आगे की कार्रवाई के लिए सौंपा जाता रहा है।
दुकानों से बॉर्डर तक कैसे पहुंचती है खेप?
स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों के अनुसार, कुछ स्थानीय दुकानों से यूरिया की खेप निकलकर वैकल्पिक रास्तों (बाईपास) के जरिए सीधे सीमावर्ती गांवों तक पहुंचाई जा रही है। इससे पहले भी पुलिस इन्हीं इलाकों से लावारिस हालत में भारी मात्रा में यूरिया की बोरियां बरामद कर चुकी है। इससे यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर आधार और OTP आधारित खरीद व्यवस्था के बावजूद, इतनी बड़ी मात्रा में खाद कैसे बाजार से निकलकर सीमा तक पहुंच जाती है।
प्रशासन और कृषि विभाग की जांच जरूरी
स्थानीय लोगों और किसान संगठनों का कहना है कि इस पूरे मामले की गहराई से जांच की जरूरत है। उनकी मांग है कि दुकानों से होने वाली बिक्री, आधार-ओटीपी आधारित खरीद प्रक्रिया और बॉर्डर क्षेत्र तक खाद पहुंचने के पूरे नेटवर्क की सिलसिलेवार जांच की जाए, ताकि यह पता चल सके कि सब्सिडी वाली खाद आखिर किसानों के खेतों की बजाय सीमा पार क्यों पहुंच रही है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी।
किसानों को हो रहा नुकसान
खाद तस्करी की इन घटनाओं का सीधा असर स्थानीय किसानों पर पड़ता है। जब सब्सिडी वाली खाद तस्करी के जरिए सीमा पार भेज दी जाती है, तो जरूरतमंद किसानों को सीजन के दौरान खाद की किल्लत का सामना करना पड़ता है। इससे न सिर्फ खेती प्रभावित होती है, बल्कि किसानों को मजबूरन ऊंचे दामों पर खाद खरीदनी पड़ती है।
खबर की मुख्य बातें (Key Points)
- महराजगंज के नौतनवां थाना क्षेत्र में सुबह के समय बाइक से भारतीय यूरिया खाद नेपाल तस्करी होने का आरोप
- भारत-नेपाल सीमा से सटा यह इलाका पहले भी कई बार तस्करी के मामलों में सामने आ चुका है
- पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर सीमा क्षेत्र में तस्करी विरोधी अभियान लगातार जारी
- कई बार साइकिल-बाइक पर लदी यूरिया बरामद कर आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं
- स्थानीय दुकानों से बाईपास रास्तों के जरिए सीमा तक खेप पहुंचने की आशंका
- आधार-OTP आधारित खरीद व्यवस्था के बावजूद तस्करी जारी रहने पर सवाल
- पूरे नेटवर्क की गहन जांच की मांग उठ रही है
- तस्करी से स्थानीय किसानों को खाद की किल्लत का सामना करना पड़ता है
4 लाइन में पूरी खबर
महराजगंज के नौतनवां क्षेत्र में सुबह के समय बाइक के जरिए भारतीय यूरिया खाद नेपाल तस्करी किए जाने का आरोप लगा है, जिससे इलाके में एक बार फिर सवाल उठ खड़े हुए हैं। यह सीमावर्ती इलाका पहले भी कई बार तस्करी के मामलों में सामने आया है, जहां पुलिस साइकिल-बाइक पर लदी खाद बरामद कर आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। स्थानीय दुकानों से बाईपास रास्तों के जरिए सीमा तक खेप पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। लोगों ने प्रशासन और कृषि विभाग से पूरे नेटवर्क की गहन जांच की मांग की है।
(यह रिपोर्ट स्थानीय समाचार स्रोतों पर आधारित है। आरोपों की पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी।)
