सिद्धार्थनगर: कागज़ों पर कुला खुदाई और मजदूरों की हाजिरी, धरातल पर शून्य काम! ग्राम परसिया में सरकारी धन की खुली लूट?1 min read
ग्राउंड रिपोर्ट | शोहरतगढ़ ब्लॉक से बड़ा खुलासा
सिद्धार्थनगर (वर्ल्ड आई भारत न्यूज़):
उत्तर प्रदेश के जनपद सिद्धार्थनगर के विकासखंड शोहरतगढ़ स्थित ग्राम पंचायत परसिया से सरकारी धन के गबन का एक नया और सनसनीखेज मामला सामने आया है। सरकारी पोर्टल पर काम और मजदूरों की हाजिरी दर्ज कर बजट ठिकाने लगाने का खेल ‘वर्ल्ड आई भारत न्यूज़’ के हाथ लगे सबूतों से उजागर हुआ है।
🚨 सरकारी रिकॉर्ड बनाम धरातल का सच (साक्ष्यों के आधार पर):
📝 रिकॉर्ड में दर्ज काम: सरकारी पोर्टल (NMMS) के अनुसार कार्य का नाम “खेतक के बाग से परमानंद के चक तक कुला खुदाई कार्य” (Work Code: 3151005027/IC/VB/YD/958486255823763303) दर्ज है।
👥 कागजी हाजिरी का खेल: पोर्टल पर बाकायदा मस्टर रोल (Msr No.: 1133) के तहत रोजाना मजदूरों को ‘Present’ (उपस्थित) दिखाकर फर्जी हाजिरी लगाई जा रही है।
🚫 धरातल की हकीकत: ‘वर्ल्ड आई भारत न्यूज़’ की टीम ने जब मौके पर जाकर देखा तो धरातल पर एक भी काम नहीं हुआ है, स्थिति बिल्कुल शून्य (कुछ भी नहीं) है। बिना कोई कार्य कराए ही कागजों में मजदूरों की हाजिरी दर्ज कर सरकारी धन निकाला जा रहा है।
❓ प्रशासन से सीधे तीखे सवाल:
जब मौके पर एक पैसे का काम नहीं हुआ, तो ऑनलाइन पोर्टल (NMMS App) पर कुला खुदाई का काम और मजदूरों की हाजिरी कैसे दर्ज हो रही है?
बिना किसी स्थलीय सत्यापन (Physical Verification) के फर्जी मस्टर रोल के आधार पर बजट कैसे पास किया जा रहा है?
इस कागजी हेरफेर और घोटाले में ग्राम पंचायत से लेकर ब्लॉक स्तर के कौन-कौन से जिम्मेदार शामिल हैं?


📢 World Eye Bharat News की सीधी मांग
’वर्ल्ड आई भारत न्यूज़’ के पास इस पूरे फर्जीवाड़े के ऑनलाइन पोर्टल रिकॉर्ड व मौके के पुख्ता साक्ष्य मौजूद हैं। हम जिला प्रशासन, मुख्य विकास अधिकारी (CDO), सिद्धार्थनगर तथा खंड विकास अधिकारी (BDO), शोहरतगढ़ से मांग करते हैं कि ग्राम पंचायत परसिया में कागजों पर चलाए जा रहे इस फर्जी कार्य की तत्काल जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त विभागीय व कानूनी कार्रवाई की जाए।
📍 स्थान: ग्राम पंचायत परसिया, विकासखंड शोहरतगढ़ (सिद्धार्थनगर)
इस रिपोर्ट का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष की छवि को धूमिल करना नहीं है, बल्कि जन-हित से जुड़े मुद्दों और सरकारी योजनाओं की वास्तविक स्थिति को सामने लाना है। संबंधित पक्ष या अधिकारियों को अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार है, और उनका पक्ष मिलने पर उसे आगे की कवरेज में शामिल किया जाएगा।
