सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: कैंसर की दवाओं के बाद क्या सभी आवश्यक दवाओं और मेडिकल उत्पादों पर भी लगेगा ट्रेड मार्जिन कैप?1 min read
स्वास्थ्य एवं कानूनी ब्यूरो | विशेष रिपोर्ट
अपडेटेड: अक्टूबर 2026
मुख्य बातें (Key Highlights):
- शीर्ष अदालत का निर्देश: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को कैंसर रोधी (anti-cancer) दवाओं से आगे बढ़कर सभी आवश्यक दवाओं और चिकित्सा उत्पादों पर ट्रेड मार्जिन (Trade Margins) सीमित करने पर विचार करने का निर्देश दिया है।
- बड़ा सवाल: अदालत ने दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों पर अत्यधिक खुदरा मुनाफे (Markups) को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है और व्यवस्था को पारदर्शी बनाने पर जोर दिया है।
- केंद्र सरकार का कदम: सुनवाई के दौरान सरकार ने कैंसर की दवाओं पर ट्रेड मार्जिन को 30 प्रतिशत तक सीमित करने की जानकारी दी, जिस पर कोर्ट ने दायरा और व्यापक करने को कहा है।
विस्तृत समाचार (Detailed News):
नई दिल्ली:
देश में आवश्यक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की बढ़ती कीमतों पर कड़ा रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक व्यापक नीति तैयार करने के लिए कहा है। सर्वोच्च अदालत ने जोर दिया है कि ट्रेड मार्जिन कैप (Trade Margin Capping) का दायरा केवल कैंसर की दवाओं तक सीमित न रखकर सभी जरूरी जीवनरक्षक औषधियों और मेडिकल उत्पादों पर भी लागू किया जाना चाहिए, ताकि आम जनता को अत्यधिक महंगी दरों से राहत मिल सके।
अदालत की सख्त टिप्पणियां और मुनाफे पर सवाल
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कुछ चिकित्सीय उत्पादों और दवाओं की मूल लागत और उनके अंतिम खुदरा मूल्य (MRP) में भारी अंतर पर गहरी चिंता व्यक्त की। अदालत का मानना है कि दवाओं के व्यापार में अत्यधिक मुनाफाखोरी से मरीजों और उनके परिवारों पर अनुचित आर्थिक बोझ पड़ता है। कोर्ट ने सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि जीवनरक्षक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए और अधिक प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं।
व्यापक नियमन की आवश्यकता
विशेषज्ञों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के इस रुख से फार्मास्यूटिकल्स सेक्टर और अस्पतालों के इन-हाउस फार्मेसी संचालन पर बड़ा असर पड़ सकता है। सरकार द्वारा दवाओं की कीमतों के नियंत्रण (DPCO) और राष्ट्रीय आवश्यक दवा सूची (NLEM) के दायरे को मजबूत करने के लिए अब आगे और सख्त कदम उठाए जाने की संभावना जताई जा रही है।
(सोर्स: द हिंदू, लाइव लॉ और अन्य कानूनी मीडिया रिपोर्ट्स से प्राप्त प्रारंभिक सूचनाएं)
(डिस्क्लेमर: यह खबर मीडिया सोर्सेज और अदालत की कार्यवाहियों से जुड़ी प्रारंभिक सूचनाओं के आधार पर तैयार की गई है। इस खबर में दिए गए विवरणों की पुष्टि हमारी वेबसाइट स्वतंत्र रूप से नहीं करती है।)
