अमीनाबाद समेत कई इलाकों में छापेमारी — 26.6 लाख की नकली दवाएं जब्त, 12 फर्में सील
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अमीनाबाद समेत कई इलाकों में छापेमारी — 26.6 लाख की नकली दवाएं जब्त, 12 फर्में सील
फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FSDA), उत्तर प्रदेश · लखनऊ व वाराणसी
राजधानी लखनऊ के अलमबाग बस स्टेशन के पास एक संदिग्ध कार्टन की जांच से शुरू हुई कार्रवाई ने आखिरकार एक बड़े अंतर-जनपदीय नकली दवा नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया है। FSDA की संयुक्त कार्रवाई में लखनऊ और वाराणसी में छापेमारी कर संदिग्ध दवाएं जब्त की गईं और 12 फर्मों का संचालन निलंबित कर दिया गया।
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₹26.6 लाख
संदिग्ध दवाओं व स्टॉक
की कुल जब्ती |
12 फर्में
संचालन निलंबित,
जांच के दायरे में |
2 गिरफ्तार
लखनऊ व वाराणसी में
मौके से पकड़े गए |
कैसे शुरू हुई जांच?
यह मामला 6 जुलाई की रात लखनऊ के अलमबाग बस स्टेशन के पास शुरू हुआ, जब अधिकारियों ने एक संदिग्ध कार्टन को रोककर उसकी जांच की। जांच में उसमें 4,800 काइमोट्रिप्सिन (Chymotrypsin) और 2,940 ऑफ्लोक्सासिन (Ofloxacin) की गोलियां बरामद हुईं। मौके से वाराणसी के एक निवासी को गिरफ्तार किया गया, जिसने पूछताछ में कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसने ये दवाएं बिना बिल और वैध लाइसेंस दस्तावेजों के हासिल की थीं और उन्हें लखनऊ व अन्य स्थानों पर सप्लाई कर रहा था। इस मामले में अलमबाग थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई।
इसी जांच के दौरान मिली जानकारी के आधार पर उसी दिन FSDA और पुलिस की संयुक्त टीम ने वाराणसी के चौधरी कटरा इलाके में भी छापा मारा। यहां बिना वैध दस्तावेजों के भारी मात्रा में एलोपैथिक दवाएं जब्त की गईं और दुकान के मालिक को गिरफ्तार किया गया।
“प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि उत्तर प्रदेश के कई जिलों में संदिग्ध नकली या बिना उचित दस्तावेज वाली दवाओं के वितरण में एक संगठित नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।”
— फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FSDA), उत्तर प्रदेश
कार्रवाई की मुख्य बातें
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🚨 जब्ती का ब्योरा
❌ अलमबाग से 4,800+2,940 संदिग्ध गोलियां बरामद ❌ वाराणसी में बिना दस्तावेज भारी दवा स्टॉक मिला ❌ करीब 25 लाख रुपये मूल्य की अतिरिक्त दवाएं सील ❌ 12 जांच के लिए भेजे गए दवा नमूने |
✅ प्रशासनिक कार्रवाई
✅ 12 फार्मास्युटिकल फर्मों का संचालन निलंबित ✅ अलमबाग व वाराणसी में अलग-अलग FIR दर्ज ✅ 2 आरोपी गिरफ्तार ✅ नेटवर्क के अन्य जिलों तक फैले होने की जांच जारी |
क्या यह बड़े नेटवर्क का हिस्सा है?
FSDA के अनुसार शुरुआती जांच से संकेत मिलते हैं कि यह मामला किसी एक जगह तक सीमित न होकर उत्तर प्रदेश के कई जिलों में फैले एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जो संदिग्ध नकली या बिना उचित दस्तावेज वाली दवाओं का वितरण कर रहा था। यह कार्रवाई उसी व्यापक अभियान की एक कड़ी है, जिसके तहत हाल के हफ्तों में लखनऊ के अमीनाबाद इलाके में भी एक बड़ा मामला सामने आया था, जहां जांच के दौरान एक नकली दवा फैक्ट्री का पता चला जो देहरादून से संचालित हो रही थी।
इसके अलावा FSDA पहले ही लखनऊ की छह फार्मास्युटिकल फर्मों की जांच कर रहा है, जिन पर बिना वैध दस्तावेजों के दवाओं की खरीद-बिक्री में संलिप्त होने का संदेह है। अधिकारियों का मानना है कि यह नेटवर्क सिर्फ लखनऊ तक सीमित नहीं, बल्कि अन्य राज्यों के दवा डीलरों और सप्लायरों से भी जुड़ा हो सकता है। जांच एजेंसियां संबंधित राज्यों के औषधि नियामक प्राधिकरणों से भी जानकारी जुटा रही हैं ताकि दवाओं की आवाजाही और नेटवर्क में शामिल सभी लोगों की पहचान की जा सके।
घटनाक्रम
📅 समयरेखा
🌙 6 जुलाई (रात) — अलमबाग बस स्टेशन के पास संदिग्ध कार्टन की जांच, वाराणसी निवासी गिरफ्तार
📝 उसी रात — अलमबाग थाने में प्राथमिकी दर्ज
🏙️ उसी दिन बाद में — वाराणसी के चौधरी कटरा में संयुक्त टीम की छापेमारी
🔬 बाद में — 12 संदिग्ध दवा नमूने लैब जांच के लिए भेजे गए
🔒 हाल ही में — 12 फर्मों का संचालन निलंबित, कुल ₹26.6 लाख की दवाएं जब्त/सील
📌 मुख्य बात: लखनऊ के अलमबाग में एक संदिग्ध कार्टन की जांच से शुरू हुई कार्रवाई वाराणसी तक फैले एक कथित नकली दवा नेटवर्क तक जा पहुंची। FSDA और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में करीब ₹26.6 लाख मूल्य की संदिग्ध दवाएं जब्त की गईं, 12 फर्मों का संचालन निलंबित किया गया और 2 आरोपी गिरफ्तार हुए। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह नेटवर्क कितने जिलों और राज्यों तक फैला है।
स्रोत: TAPA APAC · फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन, उत्तर प्रदेश।
यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया मूल हिंदी आलेख है।
