गोरखपुर: 4.09 करोड़ के साइबर फ्रॉड की रकम यूएसडीटी (USDT) में बदलने वाला एक और आरोपी गिरफ्तार1 min read
विशेष रिपोर्ट
अपडेटेड: अक्टूबर 2026
मुख्य बातें (Key Highlights):
- गिरफ्तार आरोपी: गोविन्द वर्मा (असवनपार, गगहा क्षेत्र)।
- बरामदगी: 2.51 लाख रुपये नकद, 2 लैपटॉप, 1 मोबाइल फोन और 3 एटीएम कार्ड।
- घोटाले का दायरा: देश के 14 राज्यों से जुड़े 34 फर्जी (म्यूल) बैंक खातों के जरिए 4.09 करोड़ रुपये से अधिक का फ्रॉड।
विस्तृत समाचार (Detailed News):
गोरखपुर:
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में साइबर ठगी और ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट-ट्रेडिंग के नाम पर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह के खिलाफ पुलिस और साइबर सेल ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। चिलुआताल थाना पुलिस तथा साइबर सेल की संयुक्त टीम ने ठगी के करोड़ों रुपये को क्रिप्टोकरेंसी यानी यूएसडीटी (USDT) में तब्दील कर विदेशी वॉलेट में ट्रांसफर करने वाले एक वांछित और मुख्य आरोपी को दबोच लिया है। पुलिस इस पूरे नेटवर्क के अन्य कनेक्शनों की भी गहराई से छानबीन कर रही है।
गगहा क्षेत्र से धरा गया मुख्य आरोपी
पुलिस विभाग से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस कार्रवाई के दौरान पकड़े गए आरोपी की पहचान गगहा थाना क्षेत्र के असवनपार निवासी गोविन्द वर्मा के रूप में की गई है। पुलिस ने आरोपी के पास से बड़ी मात्रा में डिजिटल और वित्तीय साक्ष्य बरामद किए हैं, जिसमें 2.51 लाख रुपये नकद, दो अत्याधुनिक लैपटॉप, एक मोबाइल फोन और तीन अलग-अलग बैंकों के एटीएम कार्ड शामिल हैं।
शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि गोविन्द वर्मा तकनीकी गैजेट्स (लैपटॉप और मोबाइल) की मदद से साइबर अपराधियों द्वारा ठगे गए पैसों को भारतीय करेंसी से क्रिप्टोकरेंसी (USDT) में कन्वर्ट कर विदेशी वॉलेट में भेजता था। वह इस अवैध नेटवर्क के एक अन्य अहम मोहरे मकसूद आलम खां के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा था। इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस पहले ही मकसूद समेत पांच अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज चुकी है।
14 राज्यों तक फैला है साइबर ठगी का विशाल जाल
पुलिस की व्यापक छानबीन में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस संगठित गिरोह द्वारा कुल 34 म्यूल (फर्जी और किराए के) बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया था। इन खातों के माध्यम से अब तक 4 करोड़ 9 लाख 11 हजार 738 रुपये का भारी-भरकम साइबर फ्रॉड किया जा चुका है।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन सभी मामलों और फर्जी खातों की शिकायतें देश के किसी एक राज्य से नहीं, बल्कि 14 अलग-अलग राज्यों से दर्ज कराई गई हैं। इन राज्यों में बिहार, गुजरात, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन खातों का उपयोग मुख्य रूप से ऑनलाइन ट्रेडिंग और हाई-रिटर्न इन्वेस्टमेंट का लालच देकर ठगे गए धन को ठिकाने लगाने के लिए किया जाता था।
20 प्रतिशत कमीशन का लालच देकर खुलवाते थे खाते
यह पूरा गिरोह एक सोची-समझी साजिश के तहत काम करता था। आरोपी भोले-भाले और आर्थिक रूप से कमजोर या जरूरतमंद लोगों को अपने जाल में फंसाते थे और उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। खाता उपलब्ध कराने वाले इन व्यक्तियों को ठगी गई कुल रकम का 20 प्रतिशत तक कमीशन देने का लालच दिया जाता था।
जैसे ही बैंक खाते सक्रिय होते थे, साइबर ठगी की अवैध रकम तुरंत इनमें ट्रांसफर करवा ली जाती थी। इसके बाद आरोपी एटीएम कार्ड या चेक के माध्यम से बैंक से नगद रुपये निकाल लेते थे। तय कमीशन काटने के बाद, शेष बची हुई मोटी रकम को विदेशी ऑपरेटरों और एजेंटों के माध्यम से क्रिप्टोकरेंसी (USDT) में बदलकर पूरी तरह सुरक्षित विदेशी वॉलेट्स में फॉरवर्ड कर दिया जाता था, जिससे पुलिस और एजेंसियों के लिए पैसों का ट्रेल ढूंढना मुश्किल हो जाता था।
(सोर्स: स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स, पुलिस/साइबर सेल का आधिकारिक प्रेस नोट और राजस्व विभाग से प्राप्त प्रारंभिक सूचनाएं)
(डिस्क्लेमर: यह खबर स्थानीय मीडिया सोर्सेज और राजस्व विभाग से प्राप्त प्रारंभिक सूचनाओं के आधार पर बनाई गई है। इस खबर में दिए गए तथ्यों और दावों की पुष्टि हमारी वेबसाइट स्वतंत्र रूप से नहीं करती है।)
