रूसी तेल पर 500% टैरिफ की धमकी घटी — भारत और चीन को अमेरिकी सीनेट के नए प्रस्ताव से बड़ी राहत
🔴 बड़ी खबर · वॉशिंगटन · जुलाई 2026
रूसी तेल पर 500% टैरिफ की धमकी घटी — भारत और चीन को अमेरिकी सीनेट के नए प्रस्ताव से बड़ी राहत
अमेरिकी सीनेट · रूस प्रतिबंध विधेयक · 14 जुलाई 2026
रूसी तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 500% तक टैरिफ लगाने की धमकी देने वाला अमेरिकी विधेयक अब नरम रूप में सामने आया है। संशोधित प्रस्ताव में अधिकतम टैरिफ दर घटाकर 100% कर दी गई है, जिससे भारत और चीन जैसे बड़े खरीदारों को राहत मिलने की उम्मीद है।
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500% → 100%
अधिकतम टैरिफ दर घटाई गई
शीर्ष 5 खरीदार देशों पर लागू |
26 सांसद
विधेयक के सह-प्रायोजक
दोनों पार्टियों का समर्थन |
छूट संभव
राष्ट्रपति के पास वेवर का अधिकार
राष्ट्रीय हित में माफी संभव |
क्या है पूरा मामला?
अमेरिकी सीनेटरों ने मंगलवार को रूस प्रतिबंध विधेयक का एक संशोधित संस्करण पेश किया, जो रूसी तेल और गैस के आयातकों — खासकर भारत और चीन — पर पहले प्रस्तावित भारी-भरकम टैरिफ की धमकी को नरम करता है। यह विधेयक दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम की पहल पर आधारित है, जिनका बीते शनिवार को अचानक निधन हो गया था।
नए संस्करण के तहत रूसी तेल और प्राकृतिक गैस के शीर्ष पांच खरीदार देशों पर अधिकतम टैरिफ दर घटाकर 100% कर दी गई है, जो पहले के प्रस्ताव में 500% तक जाने वाली थी। रूसी कच्चे तेल के शीर्ष पांच खरीदारों में चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं।
“यह लिंडसे के सम्मान में है। यह उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता थी। आप जानते हैं वे इसके बारे में क्या महसूस करते थे, और इसके पारित होने की अच्छी संभावना है।”
— डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति
पुराने और नए प्रस्ताव में क्या फर्क है?
विधेयक का उद्देश्य रूसी अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाना और टैरिफ के जरिए चीन व भारत को रूस पर ऊर्जा निर्भरता घटाने के लिए दबाव बनाना है। हालांकि संशोधित प्रस्ताव में कुछ राहत के प्रावधान जोड़े गए हैं जो पहले नहीं थे।
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🚨 पुराना प्रस्ताव
❌ रूसी तेल-गैस खरीदारों पर 500% तक टैरिफ की धमकी ❌ सभी आयातक देशों पर एक समान भारी दर ❌ किसी देश के लिए स्पष्ट छूट का प्रावधान नहीं ❌ भारत-चीन के लिए बड़ा आर्थिक जोखिम |
✅ संशोधित प्रस्ताव
✅ अधिकतम टैरिफ घटाकर 100% (शीर्ष 5 खरीदारों पर) ✅ 15% से कम गैस आयात करने वाले देशों को छूट संभव ✅ जापान, फ्रांस, हंगरी, बेल्जियम को राहत मिल सकती है ✅ राष्ट्रपति को राष्ट्रीय हित में वेवर का अधिकार |
विधेयक में और क्या शामिल है?
टैरिफ में राहत के अलावा इस विधेयक में रूस की शैडो फ्लीट (पश्चिमी समुद्री सेवाओं पर निर्भर न रहने वाले टैंकरों) पर प्रतिबंध, रूसी केंद्रीय बैंक सहित वित्तीय संस्थानों पर पाबंदी, और यमल एलएनजी तथा आर्कटिक एलएनजी 1, 2, 3 जैसी बड़ी ऊर्जा परियोजनाओं पर प्रतिबंध का प्रावधान भी है। सीनेट सहयोगियों के अनुसार यह विधेयक ईरान जैसे देशों को भी दायरे में लाता है जो रूस के रक्षा उद्योग से जुड़े हैं।
घटनाक्रम — विधेयक अब तक कहां पहुंचा?
📅 समयरेखा
📜 एक साल पहले — रूस प्रतिबंध विधेयक पहली बार पेश किया गया था
🇺🇦 बीते सप्ताह — सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने यूक्रेन दौरे के दौरान ट्रंप के साथ विधेयक आगे बढ़ाने पर सहमति की घोषणा की
🕊️ शनिवार — सीनेटर लिंडसे ग्राहम का अचानक निधन
📝 14 जुलाई 2026 — सीनेटरों ने विधेयक का संशोधित, नरम संस्करण पेश किया
🤝 अब — 26 सह-प्रायोजकों के साथ पारित होने की उम्मीद, संख्या और बढ़ने की संभावना
भारत और चीन के लिए इसका क्या मतलब है?
भारत और चीन दोनों रूसी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में शामिल हैं, इसलिए 500% के मूल प्रस्ताव से इन दोनों अर्थव्यवस्थाओं पर भारी असर पड़ने की आशंका थी। टैरिफ दर के 100% पर सीमित होने और राष्ट्रपति को छूट देने के अधिकार मिलने से दोनों देशों को फिलहाल राहत मिली है, हालांकि विधेयक अभी अमेरिकी कांग्रेस से पूरी तरह पारित नहीं हुआ है।
📌 मुख्य बात: अमेरिकी सीनेट ने रूस प्रतिबंध विधेयक का नरम संस्करण पेश किया है, जिसमें रूसी तेल-गैस खरीदारों पर टैरिफ की सीमा 500% से घटाकर 100% कर दी गई है। इससे भारत और चीन जैसे बड़े आयातकों को राहत मिली है, लेकिन विधेयक का अंतिम पारित होना और राष्ट्रपति की मंजूरी अभी बाकी है।
स्रोत: Reuters · AOL News · US News · MSN · 14-15 जुलाई 2026।
यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया मूल हिंदी आलेख है।
