सिद्धार्थनगर: बढ़नी के बसावन पाकर में खुले ‘एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र’ की पोल, गेट पर लटका है ताला और सामने लगा है कचरे का अंबार1 min read
ग्राउंड जीरो रिपोर्ट | ‘वर्ड आई भारत न्यूज़’
अपडेटेड: अक्टूबर 2026
मुख्य बातें (Key Highlights):
- गेट पर ताला और कचरे का अंबार: ‘वर्ड आई भारत न्यूज़’ की टीम द्वारा की गई जमीनी पड़ताल में यह सामने आया कि बसावन पाकर उर्फ मदरहिया में बने ‘एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र’ (कचरा घर) के गेट पर बहुत पहले से ताला लटका हुआ है, और इसके ठीक सामने कचरे का बड़ा अंबार लगा है।
- अधिकारियों से संवाद का अभाव: ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि इस बदहाल व्यवस्था को लेकर किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या सचिव से कोई सार्थक बात या सुनवाई नहीं हो पाई है।
- योजना का सिर्फ दिखावा: बाहर बड़े-बड़े बोर्डों पर ग्राम प्रधान, पंचायत अधिकारी और अन्य जिम्मेदारों के नाम चमक रहे हैं, लेकिन धरातल पर न तो इस केंद्र का कोई उपयोग हो रहा है और न ही साफ-सफाई की कोई व्यवस्था है।
विस्तृत समाचार (Detailed News):
बढ़नी (सिद्धार्थनगर):
उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के बढ़नी ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बसावन पाकर उर्फ मदरहिया में ग्रामीण स्वच्छता अभियान की पोल खोलने वाली एक और हकीकत सामने आई है। जब ‘वर्ड आई भारत न्यूज़’ की टीम ने मौके पर जाकर इस आधुनिक कचरा घर (इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सेंटर) की स्थिति का जायजा लिया, तो तस्वीर बेहद चौंकाने वाली थी।
गेट पर स्थायी ताला और बाहर फैली गंदगी
पड़ताल के दौरान यह बात सामने आई कि इस कचरा घर के मुख्य गेट पर काफी समय से ताला बंद है। कचरा प्रबंधन के लिए बनाए गए इस भवन का उपयोग एक दिन भी नहीं किया गया है। सबसे विडंबनापूर्ण पहलू यह है कि इस कचरा घर के अंदर कचरा डालने के बजाय इसके ठीक सामने ही कचरे का बड़ा ढेर लगा हुआ है, जो कागजी दावों और जमीनी हकीकत के बीच के बड़े फर्क को साफ बयां करता है।
प्रशासनिक उदासीनता और बदहाली
ग्रामीणों ने बताया कि इस पूरी व्यवस्था को लेकर न तो पंचायत स्तर पर कोई सुनवाई हो रही है और न ही सचिव या अन्य अधिकारियों से इस संबंध में कोई ठोस बातचीत हो पाई है। भवन की बाहरी दीवारों और बोर्ड पर ग्राम प्रधान (सुषकुन निशा), पंचायत अधिकारी (अवधेश कुमार) और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के नाम बड़े-बड़े अक्षरों में जरूर चमक रहे हैं, लेकिन धरातल पर हालात यह हैं कि योजना केवल नाम के लिए कागजों पर चल रही है।
’वर्ड आई भारत न्यूज़’ की टीम लगातार ग्रामीण क्षेत्रों की इन अनियमितताओं और घोटालों को प्रमुखता से सामने लाने का कार्य करती रही है।
(सोर्स: ‘वर्ड आई भारत न्यूज़’ ग्राउंड सर्वे और स्थानीय ग्रामीणों के इनपुट्स)
(डिस्क्लेमर: यह खबर मौके की जमीनी पड़ताल और प्राप्त तथ्यों के आधार पर तैयार की गई है.)
इस रिपोर्ट का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष की छवि को धूमिल करना नहीं है, बल्कि जन-हित से जुड़े मुद्दों और सरकारी योजनाओं की वास्तविक स्थिति को सामने लाना है। संबंधित पक्ष या अधिकारियों को अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार है, और उनका पक्ष मिलने पर उसे आगे की कवरेज में शामिल किया जाएगा।
